डेरा बाबा नानक पाकिस्तान की सीमा से सटा बड़ा कस्बा है। इससे करीब 200 गांव जुड़े हैं। आसपास के तमाम गांवों में खेतीबाड़ी ही मुख्य धंधा है, जिसके सहारे मजदूर व जमींदार पेट पालते हैं। डेरा बाबा नानक, पखोके टाहली साहब, बल और गांव पखोके महमार में हालात अच्छे नहीं कहे जा सकते। बेरोजगारी और बेकारी ने युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है। इस अंधेरे को बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ अशिक्षा का है।
डेरा बाबा नानक करतारपुर साहिब कॉरिडोर से करीब एक किलोमीटर दूर गांव पखोके टाहली साहब है। आबादी 700 के करीब है और गांव में छोटी मोटी खेती व मजदूरी ही धंधा है। वहां राशन की दुकान चलाने वाले युवा सुखविंदर सिंह का कहना है कि भाई साहब बेरोजगारी है, यहां सीमा पर कोई पूछने नहीं आता। न तो इंडस्ट्री है और न ही कारोबार, भला यहां पर कोई क्यों आएगा ? सरकारों ने हमारे लिए किया ही क्या है ? मैंने खुद मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर का कोर्स किया था। यकीन नहीं होगा आपको, कर्जा लेकर मेरे पिता ने पढ़ाया था और हालात क्या हुए, दर दर की ठोकरें खाने के बाद छोटी सी राशन की दुकान चला रहा हूं। यहां का युवा करेगा क्या ? नशे की तस्करी की तरफ जाना मजबूरी है, कोई शौक नहीं है किसी का।
बेटे की बात सुनकर रंजोत सिंह कुर्सी से उठ खड़ा हो गया और कहने लगा कि तुसी की गल करदे हो... मेरे तीन मुंडे ने तो तीनों ही बेरोजगार.. मेरी कुड़ी ने स्टाफ नर्स दा कोर्स कित्ता ओह वी घरे बैठी है। गांव में हालात बद से बदतर हैं क्योंकि यहां आकर भारत खत्म हो जाता है और चंद कदम दूरी पर पाकिस्तान के कंटीले तार हैं। गांव के रहने वाले मक्खन सिंह की तो आंखें भर आईं बोले-भाजी मैं ते 100-200 रुपये ही दिहाड़ी दे कमांदा हां... मेरे दोनों बच्चे भी दिहाड़ी पर हैं... दो वक्त का खाने का जुगाड़ ढंग से नहीं हो पाता। यहां का युवा करे तो क्या करे?
73 साल के जोगिंदर सिंह ने कहा कि उनकी जिंदगी तो यहां पर बसर हो गई, लेकिन युवाओं की बेरोजगारी ने उन्हें नशे की तरफ धकेल दिया है। कुछ दूरी पर गांव बल है। यहां वृक्ष की छाया में बैठे बचित्र सिंह ने तो अपनी भड़ास ही निकालनी शुरू कर दी। बोले कि किस सरकार ने सीमावर्ती इलाकों की सुध ली है। 50 साल उम्र हो चुकी है मेरी, यहां पर कोई पूछने तक नहीं आया है। शाम को छह सात बजे के बाद सन्नाटा पसर जाता है। कोई काम धंधा क्या करेगा? हमारे यहां तो एक एक किसान के पास 5-6 एकड़ ही जमीन है, जिसमें कोई खाएगा क्या और बांटेगा क्या ? सच बताऊं तो बुरा हाल है और युवा भटकता जा रहा है। गांव का युवा सन्नी कहने लगा कि कोई काम नहीं है, मैंने तो हाथ का काम सीखकर डेरा बाबा नानक में छोटी सी दुकान खोल ली है, आगे देखो क्या होता है लेकिन यहां के युवाओं को न तो शिक्षा मिल रही है और न ही नौकरी।
गांव के सरपंच के पिता अमर सिंह का कहना है कि एह ता वाहेगुरू दी मेहर है कि सब ठीकठाक चल रेहा है.. पर हालात बहुत खराब हो चुके ने... बेरोजगारी बढ़ती जा रही है और साथ ही महंगाई आसमान छू रही है। यहां का युवा शिक्षा से वंचित रहता जा रहा है.. इसलिए ही वह भटक रहा है। हमारी तो कई पीढ़ियां इस गांव में निकल गईं, यह आठवीं पीढ़ी है लेकिन दिन प्रतिदिन हालात खराब ही हो रहे हैं।