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अकाली दल को संजीवनी: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी मंच पर उतरेंगे 94 साल के बड़े बादल 

Thu, 09 Dec 2021 04:06 PM IST
निवेदिता वर्मा भारत भूषण मित्तल, बठिंडा (पंजाब) 

सार

पांच बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल बहुत शांत नेता माने जाते है। वे अपनी शंतिपूर्ण राजनीति के चलते ही पांच बार मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हुए।
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अपने परिवार के साथ पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल शीघ्र ही चुनावी मंच पर दिखेंगे। उनके नजदीकियों ने बुधवार को उनके जन्मदिन के अवसर पर इस बात की पुष्टि की है। 94 वर्ष के हो चुके बादल के मैदान में आने की खबर से अकाली दल में भी नई जान आ गई है। सूत्रों के अनुसार आगामी कुछ दिनों में पूर्व मुख्यमंत्री 2022 के चुनाव के लिए पूरी तरह से चुनाव मैदान में उतर जाएंगे। शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल भी अब बड़े बादल के सहारे आगामी चुनाव में अपनी नैया पार लगाने का प्रयास करेंगे। 

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पांच बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल बहुत शांत नेता माने जाते है। वे अपनी शंतिपूर्ण राजनीति के चलते ही पांच बार मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हुए। मौजूदा समय में बैकफुट पर चले रहे शिरोमणि अकाली दल बादल को फ्रंटफुट पर लाने की क्षमता पूर्व मुख्यमंत्री बादल में खूब है। भाजपा से किनारा होने के बाद शिअद के लिए बडे़ बादल संजीवनी बूटी बन सकते हैं। बेअदबी और कृषि कानूनों को लेकर शिअद किसानों एवं सिखों के निशाने पर रहा है। अब जैसे ही चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री बादल अपनी एक पूरी टीम के साथ चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। जिसके अंतर्गत वह अगले दस दिन में प्रदेश के विभिन्न शहरों में शिअद नेताओं एवं वर्करों के साथ बैठक कर और रैली के जरिए लोगों से रूबरू होंगे। 

इमोशनल भाषण के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री सीएम वोट हासिल करने में होते हैं कामयाब 

बड़े बादल को जब लगता है कि अकाली दल बिल्कुल बैकफुट पर चला गया है, तो वे अपने इमोशनल भाषण से वोटरों के दिलों में उतर जाते है। जब प्रदेश में बेअदबी का मामला बहुत जयादा गर्माया हुआ था तब उन्होंने कहा था कि वे श्री अकाल तख्त पर जाकर कुर्बानी दे देंगे। पिछले समय के दौरान जब किसान लगातार कृषि कानूनों को लेकर बादल परिवार का विरोध कर रहे थे तो बठिंडा के थर्मल ग्राउंड में हुई शिअद की रैली के दौरान उन्होंने भावुक होते हुए कहा था कि अगर किसानों के लिए उन्हें अपनी जान भी देनी पड़ी तो वे तैयार हैं।

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