फिरोजपुर। अब रेल डिवीजनों के अस्पतालों में रेलकर्मियों के इलाज से संबंधित बिल दिल्ली हेड क्वार्टर पास कराने के लिए नहीं भेजने पड़ेंगे। रेलवे बोर्ड ने 66 डिवीजनों के डीआरएम की पावरों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।
इस फैसले के बाद ऐसे बिलों का भुगतान डिवीजनस्तर पर डीआरएम ही कर सकेंगे। बताया जा रहा है कि फिरोजपुर डिवीजन में ऐसे पचास लाख रुपये के बिल लंबित पड़े हैं, फैसले के बाद अब उनके पास होने की उम्मीद बढ़ गई है।
इस आदेश को लागू कराने में उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन (यूआरएमयू) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एनएफआईआर के सहायक महासचिव व यूआरएमयू के प्रधान प्रवीन कुमार ने बताया कि फिरोजपुर डिवीजन के रेलवे अस्पताल में दो-तीन ऐसे सीएमएस (चीफ मेडिकल सुपरिटेडेंट)आए। इन सीएमएस ने उन रेलकर्मियों के बिल डीआरएम तक नहीं पहुंचाएं, जिन्होंने प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाते समय अपनी जेब में से पैसे खर्च किए थे।
ये बिल एकत्र होते हुए पचास लाख तक पहुंच गए। इस मामले संबंधित यूनियन ने रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर जनरल पी. प्रसाद से बातचीत की। श्री प्रसाद ने आदेश दिए हैं कि 25 हजार रुपये के बिल डिवीजन स्तर पर डीआरएम ही पास करेंगे, इससे अधिक धनराशि के बिलों की अनुमति लेने के लिए दिल्ली हेड क्वार्टर के अधिकारियों के पास भेजने होंगे। साल में 25 हजार रुपये की धनराशि के जितने भी बिल हो डीआरएम पास कर सकेंगे।
ये फैसला भारतीय रेलवे के 66 डिवीजनों में लागू होगा। प्रवीन का कहना है कि फिरोजपुर रेलवे अस्पताल में ऐसे मरीजों के लगभग पचास लाख रुपये के बिल पिछले काफी समय से लंबित पड़े हैं।
इन बिलों के भुगतान के लिए रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर जनरल पी. प्रसाद ने आदेश दे दिए हैं। लंबित पड़े सभी बिलों का भुगतान यहीं पर होगा। इस फैसले पर डीआरएम एन.सी गोयल व सीएमएस गजिंदर कुमार ने रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर जनरल पी. प्रसाद का धन्यवाद किया है।