गांव बरगाड़ी में गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की बेअदबी के मामले
में सोमवार को रिहा हुए गांव पंजगराईं खुर्द निवासी रूपिंदर सिंह व उसके
भाई जसविंदर सिंह ने पुलिस पर झूठे जुर्म मनवाने के लिए थर्ड डिग्री टार्चर
का उपयोग करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
हालांकि फरीदकोट के एसएसपी
सुखमिंदर सिंह मान ने दोनों भाइयों के इन आरोपों को खारिज किया है।
मंगलवार शाम गांव पंजगराईं खुर्द (मोगा) में सिख प्रचारकों व पंथक
जत्थेबंदियों के नेताओं की हाजिरी में रूपिंदर सिंह व जसविंदर सिंह ने कहा
कि पुलिस ने सिख समाज को बदनाम करने की मंशा से उन पर बेअदबी के झूठे आरोप
लगाकर गिरफ्तार किया था, लेकिन सिख समाज के साथ देने की वजह से साजिश
बेनकाब हो गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें 16-17
अक्तूबर की रात को हिरासत में लिया था और उन्हें मोगा के थाना मैहना स्थित
सीआईए स्टाफ ले गई थी। वहां पर पुलिस ने उन पर थर्ड डिग्री का उपयोग किया
और पावन ग्रंथ की बेअदबी का आरोप अपने सिर लेने का दबाव बनाया। पुलिस
रिमांड के दौरान फरीदकोट के सीआईए स्टाफ ने उन पर जुल्म किया गया।
इस
मौके पर सिख प्रचारक पंथप्रीत सिंह खालसा, संत बलजीत सिंह दादूवाल,
दलेरसिंह खेड़ी, सतनाम चंदड़, हरजिंदर सिंह मांझी, ज्ञानी केवल सिंह, अवतार
सिंह साधांवाला व दलेर सिंह डोड ने कहा कि गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला से
पावन ग्रंथ की चोरी का मामला सुलझाने में नाकाम रही पुलिस ने बरगाड़ी की
घटना सामने आने पर सिख जत्थेबंदियों को ही बदनाम करने की साजिश रची। इसके
तहत ही जत्थेबंदियों से जुड़े इन दोनों भाइयों को गिरफ्तार किया। पंथक
नेताओं ने कहा कि जब पुलिस 10 दिन की थर्ड डिग्री टार्चर में दोनों भाइयों
के खिलाफ रत्ती भर भी सबूत नहीं जुटा पाई तो लाई डिटेक्टर टेस्ट के कोई
मायने ही नहीं रह जाते।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने 15 नवंबर तक
शहीदी समारोह के मौके पर पंथक संगठनों की तरफ से पारित प्रस्तावों की
मांगों को पूरा न किया तो शिअद से संबंधित विधायकों, सांसदों व एसजीपीसी
सदस्यों के आवासों का घेराव किया जाएगा।