मामा ने एमसीए की जाली डिग्री देकर भांजे से पांच लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने एसएसपी को शिकायत दी है, इस मामले की जांच डीएसपी विभोर शर्मा कर रहे हैं।
कैंटोनमेंट बोर्ड में कार्यरत चपरासी पीड़ित अमरदीप पुत्र अम्मी चंद वासी बस्ती टैंकावाली ने पुलिस को शिकायत में बताया कि कैंटोनमेंट बोर्ड के एसडीई सतीश अरोड़ा उनके मुंहबोले मामा हैं। सतीश ने अमरदीप को कहा कि उसे एमसीए करनी चाहिए, लेकिन इससे पहले पीजीडीसीए करनी होगी।
इन सब पर पांच लाख रुपये का खर्च आएगा और कैंटोनमेंट बोर्ड में कंप्यूटर प्रोग्राम की एक नई पोस्ट बनी है उसमें नौकरी मिल जाएगी। उसने अपने परिजनों से बातचीत कर पांच लाख रुपये सतीश को दे दिए।
बाबा ऋषि एजुकेशन सेंटर में उसका दाखिला करवा दिया। 2003 से 2004 तक पीजीडीसीए की पढ़ाई की और 2004 से 2006 तक एमसीए की पढ़ाई की। 2004 में पीजीडीसीए की मार्कलिस्ट और 2007 में एमसीए की डिग्री दे दी। ये डिग्री बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी की ओर से जारी हुई थी।
अमरदीप ने बताया कि जालंधर कैंट बोर्ड में कंप्यूटर प्रोग्राम की पोस्ट निकली और उसके लिए अप्लाई किया। लेकिन उसे जाली डिग्री होने के कारण नौकरी नहीं दी है। उसने अपनी मार्कलिस्ट और डिग्री संबंधी अधिक जानकारी हासिल करने के लिए बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी को एक पत्र लिखा।
यूनिवर्सिटी ने जवाब दिया कि ये मार्कलिस्ट और डिग्री जाली है। उसके बाद एसएसपी हरदयाल सिंह मान को शिकायत दी है। मान ने उक्त मामले की जिम्मेदारी डीएसपी विभोर शर्मा को सौंपी है।
अमरदीप ने पुलिस को दी शिकायत में यह भी बताया कि कैंटोनमेंट बोर्ड में कई ऐसे मुलाजिम हैं जो नौकरी कर रहे हैं उन्हें सतीश ने जाली डिग्रियां दिलवाई हैं। उधर, कैंटोनमेंट बोर्ड फिरोजपुर के एसडीई सतीश अरोड़ा ने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। उन पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं।