आम आदमी पार्टी (आप) की टोपी पर बने झाडूृ के निशान के कारण इसे पहनने को लेकर जारी फतवे के बाद मामले को लेकर बहस छिड़ गई है। हालांकि टोपी पहनने अथवा न पहनने को लेकर मुस्लिम समाज के विद्वानों और धार्मिक नेता एकमत नहीं हैं। ऐसे में इसे लेकर समाज के आम लोगों में असंमजस की स्थिति नजर आ रही है।
शनिवार को वाराणसी से मुस्लिम समाज की ओर से जारी फतवे के तहत आप की टोपी पहनने को लेकर एतराज जताया गया था। फतवे में दलील दी गई है कि आप की टोपी पर झाडू़ का निशान है, जोकि धार्मिक मर्यादा के अनुसार गैरवाजिब है।
फतवे में मुस्लिम समाज को इसे पहनने से मनाही की गई है। उधर, रविवार को आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के पंजाब से प्रवक्ता मुफ्ती मौलाना फजैल-उल-रहमान हिलाल उसमानी ने इस मुद्दे पर दो टूक कहा कि आप की टोपी में कहीं कोई बुराई नहीं है। न ही झाड़ू़ के निशान से धार्मिक मर्यादा में कहीं कोई नुकसान पहुंचता है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे फतवों का क्या उद्देश्य है, यह उनकी समझ से परे है।
झाडू़ के निशान की टोपी पर उन्हें कोई हर्ज नहीं है। उधर,आल इंडिया जमात-उल-उलेमा हिंद के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष मौलाना वहाब्बुद्दीन कासमी का कहना है कि आप की टोपी का इस्लाम से कोई संबंध नहीं है, इसलिए इससे पहनने में कोई हर्ज नहीं है।
दूसरी ओर समाजसेवी संस्था मालेरकोटला चेरीटेबल एवं वेलफेयर ट्रस्ट के प्रवक्ता शहजाद हुसैन ने इस मामले को सस्ती शौहरत हासिल करने का शिगूफा करार दिया है। शहजाद ने कहा कि आम आदमी पार्टी की झाड़ू छाप टोपी को सिर्फ उनकी अपनी पार्टी के चुनाव चिह्न के रूप में समझा जाना चाहिए। इस टोपी को किसी धर्म से जोड़ना गलत हैं।