फरीदकोट के गांव बहबल कलां में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के बाद
कोटकपूरा में बीते साल 14 अक्तूबर को हुए लाठीचार्ज एवं गोली कांड की जांच
कर रहे एक सदस्यीय जस्टिस (रिटायर्ड) जोरा सिंह न्यायिकजांच आयोग के समक्ष
बुधवार को लोक निर्माण विभाग के स्थानीय रेस्ट हाउस में तत्कालीन एसएसपी
चरनजीत सिंह ने पेश होकर अपना शपथ पत्र दिया।
इस दौरान आयोग ने उनसे
पूछताछ भी की। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मोगा के गांव मल्लके में हुई
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटना इसकी जांच का हिस्सा नहीं है।
जस्टिस (रिटायर्ड) जोरा सिंह ने बताया कि आयोग पुलिस अफसरों एवं
लाठीचार्ज-गोली कांड में घायलों के अलावा इस घटनाक्रम के बारे में जानकारी
रखने वाले आम लोगों से शपथ पत्र हासिल कर जांच कर रहा है।
यहांके
तत्कालीन एसएसपी चरनजीत सिंह ने पेश हो कर अपना शपथ पत्र दिया। आयोग ने
उनसे इस घटना के बारे में पूछताछ की। आयोग ने सहयोग की मांग करते घटनाक्रम
से जुड़े लोगों को जानकारी शपथ पत्र के रूप में देने के लिए कहा। उन्हाेंने
बताया कि आयोग वीरवार और शुक्रवार को दो दिन फरीदकोट में मौजूद रहेगा। इस
घटनाक्रम के बारे में कोई भी व्यक्ति हलफनामे के जरिये अपनी जानकारी दे
सकता है।
इस घटना में पुलिस की ओर से गिरफ्तार गांव पंजगरांई खुर्द
के दो भाइयों रूपिंदर सिंह और जसविंदर सिंह ने आयोग से संपर्क नहीं किया।
अब आयोग दोनों भाइयों से इस घटनाक्रम के बारे में जानकारी हासिल करने के
लिए संपर्क करेगा। इस घटना के दौरान घायल तकरीबन 45 लोगों में से बहुत से
घायलों का अस्पताल में पूरा रिकॉर्ड न होने से आयोग को उन तक पहुंचने के
लिए मुश्किल हो रही है।
मोगा और फरीदकोट पुलिस की तरफ से रिकॉर्ड देने से टालमटोल
न्यायिक
जांच आयोग ने मोगा, फरीदकोट, मानसा, बठिंडा, फिरोजपुर और फाजिल्का आदि
जिला पुलिस मुखियों को पत्र लिख कर यह जानकारी मांगी है कि जिला फरीदकोट के
कस्बा बरगाड़ी में इस घटना के दौरान कितने पुलिस कर्मी ड्यूटी के लिए वहां
भेजे गए, उन्हें कौन सा हथियार और कितना गोली सिक्का जारी किया गया। इसमें
से कितने गोली सिक्कों का प्रयोग किया और कितने वापस जमा करवाया गए थे।
इस
बारे में आयोग को कई जिला पुलिस मुखियों ने जानकारी उपलब्ध करा दी, लेकिन
बार बार पत्र लिखने के बावजूद मोगा और फरीदकोट पुलिस रिकॉर्ड देने से टाल
मटोल कर रही है। आयोग ने इस घटना के मौके विशेष ड्यूटी के लिए बुलाई पंजाब
हथियारबंद पुलिस (पीएपी) की दोनों बटालियनों से भी जानकारी मांगी है।