मालेरकोटला (संगरूर)। आखिरकार पंजाब में मुस्लिमों की समस्याओं के समाधान के लिए शरीयत अदालतों के गठन का रास्ता साफ हो गया है। राज्यस्तर पर रविवार को मालेरकोटला में आयोजित की गई मुस्लिम महापंचायत में इस बाबत आम सहमती बन गई है और पंजाब सरकार की ओर से इस महा सम्मेलन में पहुंचे वित्त मंत्री परमिंद्र सिंह ढींढसा ने भी इसके लिए मदद देने का ऐलान किया है।
काबिलेजिक्र है कि मुस्लिमों में तलाक-निकाह और विरासत में बढ़ते जा रहे मामलों को धार्मिक मर्यादा से निपटाने के लिए देश के अन्य राज्यों की तरह पंजाब में भी शरीयत अदालत के गठन की मांग दशकों से उठ रही है, जिसे अब पंजाब वक्फ बोर्ड के सहयोग से पूरा किया जा रहा है। रविवार को यहां वक्फ बोर्ड के बैनर तले विशाल महा पंचायत बुलाई गई थी। जिसमें पंजाब भर के मौलाना, मुफ्ती और दीन की जानकारी रखने वाले उलेमा हजरात ने पहुंचकर शरीयत पंचायत के गठन को लेकर अपने अपने विचार रखे और सभी ने एकमत होकर इसके लिए सहमती देते हुए पंजाब में काजी की नियुक्ति किए जाने को लेकर भी आवाज उठाई। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन इजहार आलम ने इसके लिए लंबे समय तक प्रयास जारी रखने की भी बात कही है।
ऐसे होता है शरीयत अदालतों का गठन
शरीयत अदालत का गठन करने के लिए पंजाब भर के मौलाना और मुफ्ती (जो फतवा जारी करता है) की राय लेकर एक काजी की नियुक्ति की जाती है। काजी के पास एक मजिस्ट्रेट के बराबर की पावर होती है, जो दोनों पक्षों को सुनेगा और इस्लामिक मर्यादा के अनुसार फैसला/राय देगा। दरअसल शरीयत अदालतों की जरूरत इस लिए महसूस की गई क्योंकि पंजाब की जो दूसरी अदालतें हैं उनमें मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की हिदायतों को गहराई से समझने में दिक्कतें आती हैं। क्योंकि पर्सनल लॉ बोर्ड की हिदायतें उर्दू या अरबी में हैं। काजी के साथ भी एक टीम बनाई जाएगी, जिसके सदस्यों की संख्या के बारे में फैसला लेना बाकी है।