रेल डिवीजन फिरोजपुर में 2009 से 2013 तक विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त सिर्फ 33 रेलकर्मियों को अनफिट कर उनके बच्चों को नौकरी दी, जबकि यह संख्या सैकड़ों में है।
ऐसे कर्मी बिना वेतन के घर पर चारपाई पर लेटे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो चुकी है। कई ने घर की बिगड़ी आर्थिक स्थिति को देख कथित तौर पर खुदकुशी भी कर ली है।
रेल डिवीजन फिरोजपुर में सैकड़ों रेलकर्मी ऐसे हैं जो लंबी बीमारी के कारण चारपाई पर पड़े हैं, इन्हें अनफिट कर इनके बच्चों को नौकरी नहीं दी जा रही है।
लंबी बीमारी के चलते इनकी छुट्टियां भी समाप्त हो चुकी हैं और वेतन नहीं मिल रहा है। ऐसी स्थिति में इनकी आर्थिक हालत बहुत खराब है। कई कर्मी कथित तौर पर खुदकुशी कर चुके हैं।
बताया जा रहा है कि जगरांव रेलवे स्टेशन पर तैनात एक टिकट बुकिंग कर्मी लंबे समय से बीमार था, रेलवे के डाक्टर उसे अनफिट भी नहीं कर रहे थे। उसके घर की हालत बहुत बिगड़ चुकी थी। उसकी ट्रेन के नीचे आने से मौत हो गई। फिरोजपुर डिवीजन में ऐसे सैकड़ों कर्मचारी हैं।
सूचना अधिकार के तहत रेल डिवीजन फिरोजपुर से मांगी जानकारी में रेलवे अस्पताल के सीएमएस ने कहा कि 2009 से 2013 तक सिर्फ 33 रेलकर्मियों को अनफिट किया है।
सच्चाई यह है कि सैकड़ों कर्मी लंबी बीमारी के कारण घर पर बैठे हैं, जो नौकरी करने के लायक नहीं हैं। इन्हें रेलवे के डाक्टर अनफिट नहीं कर रहे हैं ताकि उनके बच्चे को नौकरी मिल सके। ऐसी स्थिति में उनके घर का गुजारा नहीं चल रहा है।
बताया जा रहा है कि रेलकर्मी गोपी राम, किशोर कुमार और सेवा राम लंबे समय से बीमार थे। इनकी छुट्टियां भी खत्म हो चुकी थीं। घर पर लंबी बीमारी के कारण बिना वेतन के थे।
इससे इनके घर की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी थी। डाक्टरों ने इन्हें अनफिट नहीं किया। जब इनकी मौत हो गई, तब जाकर परिवार के एक सदस्यों को बड़ी मुश्किल से नौकरी दी।
यूनियन ने कई बार बीमार रेलकर्मियों के मुद्दे को उठाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उधर डीआरएम एनसी गोयल का कहना है कि अनफिट करना डाक्टरों का कार्य है। यदि डाक्टर अनफिट कर देते हैं, वो अगली कार्रवाई उनका विभाग करने को तैयार है।