गेहूं खरीद का सीजन 30 अप्रैल के आसपास चरम सीमा पर होने के कारण पंजाब में मतदान का ग्राफ काफी नीचे जा सकता है। इसका चुनाव परिणामों पर दूरगामी असर देखने को मिलेगा।
राज्य के किसानों, मजदूरों व गेहूं व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि पंजाब में चुनाव पहले या अंतिम चरण में होना चाहिए ताकि हर मतदाता स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान प्रमिल कलानी ने बताया कि 30 अप्रैल को पंजाब में गेहूं बिक्री का सीजन चरम सीमा पर होगा। ऐसे में किसान, व्यापारी, मजदूर व सरकारी अधिकारी मंडियों और खरीद केंद्रों में व्यस्त होंगे जिससे मतदान कम होने की आशंका है।
कलानी ने बताया कि गेहूं की विधिवत खरीद करवाना सरकार के लिए एक चुनौती भरा कार्य होता है और इसके लिए सरकार को पहले से ही तैयारी करनी पड़ती है।
इसी के साथ ही लाखों मजदूर वर्ग पंजाब की मंडियों से लेकर खेतों तक फैला होता है। गांवों में रहने वाले मजदूर व किसान वर्ग के लोग परिवार सहित सुबह से ही खेतों में गेहूं कटाई के लिए पहुंच जाते हैं जबकि शहरों से बड़ी तादात में मजदूर वर्ग मंडियों में मजदूरी करने लगा होता है। ऐसे में अगर पंजाब में 30 अप्रैल को मतदान होता है तो कई मतदान केंद्र सूने रह सकते हैं।
कलानी ने सरकार से मांग की है कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त से पंजाब के चुनाव की तारीख बदलने की सिफारिश करे। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि पंजाब के चुनाव या तो पहले चरण में करवाए जाएं या फिर अंतिम चरण तक आगे बढ़ाए जाएं ताकि किसान व मजदूर वर्ग खेतों और मंडियों से फुर्सत होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेे।
गांव पंजकोसी के सरपंच संजीव पूनियां, पंचायत समिति की चेयरपर्सन सुलोचना पूनियां गांव रामसरा के जमींदार विक्रम कासनियां तथा गांव डंगरखेड़ा के किसान राजिंद्र खोसा ने भी चुनाव आयोग से पंजाब में चुनाव की तारीख बदलने की मांग की है।