फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sangrur By Election: संगरूर उपचुनाव में सिर्फ 45.30 फीसदी मतदान, 31 साल बाद हुई सबसे कम वोटिंग

Fri, 24 Jun 2022 01:11 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सीएम भगवंत मान ने पद संभालने के बाद संगरूर के सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था। 23 जून को संगरूर में उपचुनाव हुए थे लेकिन मतदान के लिए लोग बाहर नहीं निकले और काफी कम वोट पड़े। 
विज्ञापन
संगरूर उपचुनाव में मतदान के लिए लाइन में खड़े लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संगरूर लोकसभा सीट उपचुनाव पर गुरुवार को 45.30 फीसदी वोटिंग हुई। मतदान का फाइनल आंकड़ा जारी हो गया है। संगरूर सीट सीएम भगवंत मान का गढ़ मानी जाती है। संगरूर लोकसभा के उपचुनाव में कम हुए मतदान को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। शर्मा का कहना है कि पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने लोगों को निराश किया है।सरकार को संगरूर उपचुनाव से सबक लेना चाहिए।

31 साल बाद हुआ इतना कम फीसदी मतदान

इससे पहले 1991 में यानी 31 साल पहले आतंकवाद के दौरान संगरूर में बहुत कम मतदान हुआ था। उस समय महज दस फीसदी वोट ही पड़े थे। आतंकवादियों ने धमकी दी थी कि चुनाव लड़ने वालों को हम देखेंगे। इसके बाद अकाली दल ने उस समय चुनाव का मुकम्मल बहिष्कार कर दिया था। तब कांग्रेस के प्रत्याशी गुरचरण सिंह दद्दाहूर एमपी बने थे। जबकि सीपीएम के चंद सिंह चोपड़ा दूसरे नंबर पर रहे और बहुजन समाज पार्टी के आत्मा सिंह सहजड़ा तीसरे स्थान पर रहे थे।

कहां कितने वोट पड़े 

गुरुवार को हुए उपचुनाव में लहरा में 43.1 फीसदी, दिड़बा में 46.77, सुनाम में 47.22, भदौड़ में 44.54, बरनाला में 41.43, महलकलां में 43.8, मालेरकोटला में 47.66 और संगरूर में 44.96 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया। वहीं धुरी में सबसे अधिक 48.26 फीसदी वोट पड़े। 

मतदाताओं में नहीं दिखा था उत्साह 

संगरूर लोकसभा उपचुनाव को लेकर लोगों में उत्साह कहीं नजर नहीं आया था। अधिकतर पोलिंग बूथों में सन्नाटा पसरा हुआ था। प्रशासन की तरफ से मतदाताओं को वोट के प्रति जागरूक करने के लिए पिछले कई दिनों से किए जा रहे प्रयास धरे के धरे रह गए। शहर में लगे पोलिंग बूथों पर आप, भाजपा व शिअद (अमृतसर) के पोलिंग बूथों पर पोलिंग एजेंट जरूर बैठे थे, लेकिन कांग्रेस व अकाली दल के पोलिंग बूथ पर कोई भी एजेंट मौजूद नहीं था। गांवों में धान का सीजन मतदान कम होने का कारण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के गांव में भी कम मतदान 

कम मतदान से मुख्यमंत्री भगवंत मान का गांव सतौज भी अछूता नहीं रहा। मुख्यमंत्री के गांव में भी लोगों ने वोट डालने में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। मुख्यमंत्री की माता हरपाल कौर ने वोट डालने के बाद कहा था कि धान बिजाई के सीजन के चलते लोग खेतों में व्यस्त हैं। 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें