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Farmer Protest: पंजाब में किसानों ने तीन घंटे रोकी ट्रेनें, लखीमपुर कांड के आरोपियों को सख्त सजा देने की मांग

Mon, 03 Oct 2022 01:30 PM IST
निवेदिता वर्मा अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब

सार

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने सोमवार को सुनाम के तहसील परिसर में केंद्र व राज्य सरकार की अर्थी फूंक कर रोष प्रदर्शन किया। बाद में एसडीएम जसप्रीत सिंह को प्रधानमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपा गया।
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किसानों के प्रदर्शन के कारण लुधियाना रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के आह्वान पर पंजाब में किसान संगठनों ने सोमवार को दोपहर 12 से तीन बजे तक रेलवे ट्रैक जाम किए। किसान संगठनों की ओर से रेल रोको की कॉल के कारण सोमवार को रेलवे विभाग और यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। फरीदकोट में जींद से फिरोजपुर जा रही ट्रेन रोककर नारेबाजी की गई।

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किसान नेता बूटा सिंह व हरपाल सिंह ने कहा कि लखीमपुर खीरी की घटना के आरोपियों को सख्त सजाएं देने समेत अन्य मांगों को लेकर संघर्ष कमेटी की तरफ से रेल रोको आंदोलन किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार पिछले लंबे समय से किसानों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रही। पिछले साल श्री गुरू नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर प्रधानमंत्री ने खेती कानून वापिस लेने समेत अन्य मांगों को जल्द पुरा करने का भरोसा देकर दिल्ली आंदोलन खत्म करवाया था लेकिन आंदोलन खत्म होने के बाद किसानों की जायज मांगों को अभी तक पूरा नहीं किया गया।

तीन घंटे तक खड़ी ट्रेनों में बंधक बनकर बैठे रहे यात्री

प्रदेश में अमृतसर, ब्यास, फरीदकोट, टांडा, फिरोजपुर और मोगा सहित कई जगहों पर ट्रैक जाम होने से पटरी पर दौड़ रही ट्रेनों की रफ्तार थम गई। अमृतसर की तरफ जाने वाली ट्रेनों को राजपुरा, सरहिंद, खन्ना, लुधियाना, फगवाड़ा, जालंधर तथा ब्यास के पास रोक दिया गया। 

दिल्ली-पठानकोट एक्सप्रेस, शान-ए-पंजाब एक्सप्रेस और दादर एक्सप्रेस लुधियाना स्टेशन पर रुकी रहीं। शताब्दी एक्सप्रेस और नंगल डैम एक्सप्रेस को फगवाड़ा, जनसाधारण एक्सप्रेस को जालंधर सिटी, अमरपाली एक्सप्रेस को करतारपुर, मालवा एक्सप्रेस को चोलांग, स्वराज एक्सप्रेस को भोगपुर और चंडीगढ़-अमृसतर इंटरसिटी को टांगरा स्टेशन पर रोका गया। 

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ट्रैक क्लीयर नहीं मिलने के कारण अमृतसर और जम्मू की तरफ से आने वाली ट्रेनें भी प्रभावित हुई। अप और डाउन रूट की लगभग सभी ट्रेनें बीच रास्ते में रुकी रहीं और इनमें सवार यात्री करीब तीन घंटे तक खड़ी ट्रेनों में बंधक बनकर बैठे रहे। वहीं टिकट खिड़कियों पर टिकट रिफंड लेने वाले यात्रियों का जमावड़ा लगा रहा। 

शाम तीन बजे के करीब ट्रैक क्लीयर होने के बाद रास्ते में रुकी ट्रेनों को गंतव्य की ओर रवाना किया गया, जिसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। देर शाम तक ट्रेनों की समयसारिणी बुरी तरह से बिगड़ चुकी थी। अधिक्तर ट्रेनें अपने तय समय से कई घंटे की देरी से चल रही थी।

संगरूर में एसडीएम दफ्तर के सामने प्रदर्शन

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां की तरफ से स्थानीय एसडीएम दफ्तर के सामने रोष प्रदर्शन किया गया। रोष प्रदर्शन का नेतृत्व यूनियन के ब्लाक अध्यक्ष गोबिंदर सिंह मंगवाल ने किया। उन्होंने कहा कि लखीमपुर खीरी कांड के आरोपियों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने पंजाब सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि शराब की फैक्टरी के कारण जमीन का निचला पानी दूषित हो रहा है। उसके खिलाफ किसान यूनियन की तरफ से धरना लगाया गया है लेकिन राज्य सरकार इस तरफ कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने एलान किया कि 9 सितंबर को संगरूर स्थित मुख्यमंत्री भगवंत मान के निवास के सामने धरना लगाया जाएगा। 
इस मौके बूटा सिंह लौंगोवाल, रणजीत सिंह लौंगवाल, हैप्पी शेरों, कर्मजीत सिंह मंगवाल, गुरदीप सिंह कम्मोमाजरा, लाभ सिंह खुराना, किरनजीत मंगवाल, किशन बालियां, भूरा सिंह, भोला सिंह मौजूद थे।

सुनाम में भाकियू उगराहां का प्रदर्शन

वहीं भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने सोमवार को सुनाम के तहसील परिसर में केंद्र व राज्य सरकार की अर्थी फूंक कर रोष प्रदर्शन किया। बाद में एसडीएम जसप्रीत सिंह को प्रधानमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपा गया। इसमें मांग की गई कि 3 अक्तूबर 2021 को लखीमपुर खीरी हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता अजय मिश्र टेनी को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के पद से बर्खास्त कर जेल भेजा जाए। निर्दोष किसानों को जेल से बिना शर्त रिहा किया जाए।

जिला अध्यक्ष अमरीक सिंह, रामशरण, भगवान सिंह, गोविंद सिंह, माणक सिंह ने कहा कि पिछले साल इसी दिन उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया कस्बे में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से लौट रहे किसानों को थार जीप से कुचला गया था। इसमें 4 किसान और एक पत्रकार शहीद हो गए थे और 13 से अधिक किसान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के पीछे एक सोची समझी साजिश थी, जिसे केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी ने अपने बेटे आशीष मिश्र टेनी के साथ मिलकर बनाया था। इसके खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए।

शहीद किसानों के अंतिम संस्कार के दौरान कुछ मांगों को लेकर सरकार ने किसान नेताओं के साथ समझौता किया था, लेकिन केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने उन मांगों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। आजादी के 75 साल पूरे होने पर लखीमपुर खीरी में हुई किसान महापंचायत में भी इन मांगों को जोरदार तरीके से दोहराया गया, लेकिन फिर भी सरकार नहीं मानी। किसान विरोधी इस व्यवहार से व्यथित किसानों और देश भर के सभी वर्गों के लोगों ने आज पहली वर्षगांठ के अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए केंद्र सरकार का पुतला फूंककर अपना आक्रोश व्यक्त किया है।

बठिंडा में डीसी कार्यालय के आगे लगा धरना  

बठिंडा में भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के बैनर तले किसानों ने सोमवार को लखीमपुर खीरी की घटना के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ धरना लगाकर नारेबाजी की और हनुमान चौक तक रोष मार्च निकाला। किसानों ने केंद्र सरकार के नाम एडीसी राहुल को मांग पत्र सौंपा। 

भाकियू नेता हरजिंदर सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने एक साजिश के तहत यूपी के लखीमपुर खीरी में 3 अक्तूबर 2021 को एक घटना को अंजाम दिलाया था। एक वर्ष बाद भी घटना के असल आरोपियों को सजा नहीं मिली है। उन्होंने मांग की कि इस घटना में जान गंवा चुके किसानों के परिवारों को में से एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाए। किसानों ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने अभी भी आरोपियों को बचाने का प्रयास किया तो आने वाले समय में किसान बडे़ स्तर पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
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पटियाला में किसानों का प्रदर्शन 

लखीमपुर खीरी घटना के विरोध में सोमवार को पटियाला में संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से डीसी दफ्तर के आगे धरना दिया गया। इस दौरान किसानों की ओर से केंद्र सरकार का पुतला फूंका गया और लखीमपुर खीरी कांड के आरोपियों को जल्द सख्त सजा देने की मांग की गई। मांग पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

इस मौके किसान नेता दविंदर सिंह पुनिया, गुरमेल सिंह आदि ने कहा कि लखीमपुर खीरी घटना के आरोपी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को कैबिनेट से बाहर किया जाए और उसे गिरफ्तार करके बनती सजा दी जाए। इसके साथ जेलों में बंद किसानों की रिहाई की पुरजोर मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही पंजाब के पानी के मसले को अंतरराष्ट्रीय रिपेरियन कानून के अनुसार हल करने, गन्ने के रहते बकाया का तत्काल भुगतान करने व गन्ने का भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल करने, पराली की संभाल के लिए प्रति क्विंटल 200 रुपये या 6000 रुपये प्रति एकड़ का बोनस देने की मांग की गई। इसके अलावा लंपी स्किन बीमारी से मरी गायों और बारिश व ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा देने की भी पंजाब सरकार से मांग की गई। किसान नेताओं ने कहा कि अक्तूबर 2021 में बेमौसमी बारिश के चलते बर्बाद हुईं फसलों का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। अब इस साल पहले चायनीज वायरस व अब बारिश से फसलों का काफी नुकसान हुआ है। सरकार को तुरंत प्रभावित किसानों को बनता मुआवजा देना चाहिए।
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