जीरा में फैक्टरी के सामने धरने पर बैठे किसान।
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पंजाब के फिरोजपुर में गांव मनसूरवाल स्थित एक फैक्टरी के सामने चल रहे धरने में सोमवार को करीब 40 हजार किसान शामिल होने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि फैक्टरी को हर हाल में बंद करके रहेंगे, चाहे उन्हें जान की कुर्बानी ही क्यों न देनी पड़े। किसानों का आरोप है कि फैक्टरी के दूषित पानी से जीरा के 60 गांव प्रभावित हो रहे हैं।
बता दें कि 24 जुलाई से फैक्टरी के सामने ग्रामीण दिन रात धरना दे रहे हैं। उधर, जिला व पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को समझाया कि हाईकोर्ट के आदेश हैं कि धरना फैक्टरी से 300 मीटर दूर लगाए। विभिन्न गांवों से भेजे गए पानी के सैंपल को एनजीटी क्लीन चिट दे चुकी है। फिर भी प्रदर्शनकारियों को एतराज है तो अदालत में अपील कर सकते हैं लेकिन फैक्टरी के सामने धरना देकर कामकाज को प्रभावित नहीं कर सकते।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पानी सैंपलों की रिपोर्ट एनजीटी को एक सप्ताह में देनी थी। इसमें 40 दिन लग गए। यही नहीं रिपोर्ट में पानी और जमीन में अल्कोहल व इथेनॉल का टेस्ट नहीं किया है। इसीलिए ये रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे वातावरण व पानी बचाने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें जिला व पुलिस प्रशासन धमकाने में लगा है।
पुलिस प्रशासन इस धरने को बहिबल व कोटकपूरा मोर्च जैसा बनाना चाहता है। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि धरना स्थल पर पुलिस भेजना बंद करे। धरने में मौजूद पंजाब नेता अमृतपाल ने कहा कि अपना हक लेने के लिए कुर्बानी देनी पड़ेगी।
गांव मनसूरवाल कलां में चल रहा किसानों व ग्रामीणों का धरना धीरे-धीरे दिल्ली आंदोलन जैसा रूप धारण करता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यहीं पर दवाओं के स्टाल लगा दिए हैं, ताकि किसी की तबीयत खराब हो तो उसे दवा दे सकें। खानपान का लंगर भी चल रहा है। धरने में लोगों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। प्रदर्शनकारी कोई नुकसान न पहुंचाए, इसके लिए पुलिस प्रशासन ने पूरे इंतजाम कर रखे हैं।