मॉडर्न जेल के एक विचाराधीन कैदी की मंगलवार सुबह गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो गई। मृतक कोटकपूरा निवासी बिक्रम सिंह (40) को एक सप्ताह पहले ही नशीली गोलियों के साथ गिरफ्तार किया गया था और अपनी गिरफ्तारी वाले दिन से वह डिप्रेशन में था।
जानकारी के अनुसार कोटकपूरा में शहीद भगत सिंह कॉलेज रोड पर क्लिनिक चलाने वाले आरएमपी डॉक्टर बिक्रम सिंह को 10 जून को थाना सिटी कोटकपूरा पुलिस ने 250 नशीली गोलियों के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया था। अदालत में पेशी के बाद अगले ही दिन 11 जून को उसे मॉडर्न जेल भेज दिया गया। दो किशोर बच्चों के पिता बिक्रम सिंह की पत्नी भी कैंसर से जूझ रही है।
जेल अधीक्षक कुलविंदर सिंह थियाडा के अनुसार जेल में पहुंचते ही डॉ. बिक्रम डिप्रेशन का शिकार हो गया था। हालत बिगड़ने पर उसे 15 जून को सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहां से उसे मेडिकल अस्पताल में रेफर किया गया था और वहां मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई। मृतक के भाई सुरजीत सिंह ने बिक्रम सिंह की मौत के लिए कोटकपूरा पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके भाई को झूठे मामले में जेल भेजा था और डिप्रेशन से ही उसकी मौत हुई है। इस मामले में जिला प्रशासन ने भी न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं और मंगलवार को ही मृतक के शव का न्यायिक दंडाधिकारी सतीश कुमार की निगरानी में पोस्टमार्टम करवाया गया है।
विवाद में घिरी जिला पुलिस
फरीदकोट। मॉडर्न जेल के एक विचारधीन कैदी की मौत से जिला पुलिस भी विवादों में घिर गई है। पुलिस पर पहले ही नशा विरोधी मुहिम के नाम पर नशे के आदी लोगों को जेलों में बंद करने के आरोप लग रहे हैं और अब बिक्रम सिंह की मौत ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है।