किसान यूनियन व अन्य संगठन डॉक्टरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। वहीं डॉक्टरों की तरफ से किए गए सड़क जाम के कारण आधा घंटे तक ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ गई। सड़कों पर वाहनों की लाइन लग गई। इतना ही नहीं गर्मी और जाम के कारण लोगों को काफी परेशानी भी झेलनी पड़ी।
पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने सौंपा इस्तीफा
अमृतसर में शुक्रवार को पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अमरदीप सिंह ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। डॉ. सिंह ने यह इस्तीफा पंजाब स्टेट वेटरिनरी एसोसिएशन की अमृतसर जिला इकाई के प्रधान डॉ. गगनदीप सिंह ढिल्लों को सौंपा।
डॉ. अमरदीप सिंह ने पीसीएमएस, वेटरिनरी, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक के संयुक्त फ्रंट के सामने एलान करते हुए पंजाब सरकार के खिलाफ रोष जताया। इस अवसर पर इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. चंद्र मोहन और डॉ. रविंदर सिंह कंग समेत कई अन्य डाक्टर भी मौजूद रहे।
डॉ. अमरदीप सिंह ने बताया कि छठा वेतन आयोग लागू किए जाने के बाद वेटरिनरी डॉक्टरों का दर्जा पीएसएमएस डॉक्टरों से कम हो गया है। उन्हें ए क्लास से बी क्लास कर दिया गया है। इससे वेटरिनरी डॉक्टरों को ठेस लगी है। पंजाब सरकार के खिलाफ डॉक्टरों के चल रहे आंदोलन को कमजोर करने के लिए पीसीएमएस बठिंडा के जिला प्रधान डॉक्टर गुरमेल का तबादला कर दिया गया है।
वेटरिनरी डॉक्टर एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. गगनदीप सिंह ढिल्लों ने कहा कि डॉ. अमरदीप सिंह का इस्तीफा पंजाब स्टेट बॉडी को भेज दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर पंजाब सरकार ने डॉक्टरों के खिलाफ अपना रुख नहीं बदला तो राज्य स्तर पर डॉक्टरों द्वारा इस्तीफा अभियान भी चलाया जा सकता है।
पैरामेडिकल स्टाफ व कोरोना वॉलंटियर ने दी आत्मदाह की चेतावनी
जालंधर में पैरामेडिकल स्टाफ व कोरोना वालंटियर को सरकार व जिला प्रशासन ने अब बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दूसरी तरफ पैरा मेडिकल स्टाफ व कोरोना वालंटियर ने भी जिला प्रशासन व सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनको नौकरी से निकाला गया तो वह डीसी दफ्तर में आत्मदाह कर लेंगे।
अपनी नौकरी जाने से गुस्साए पैरामेडिकल स्टाफ व कोरोना वालंटियर ने डीसी दफ्तर में सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। पैरामेडिकल स्टाफ की प्रिया ने कहा कि कोरोनाकाल में 50 हजार रुपये सैलरी लेने वाले अधिकारी घर में बैठे थे व हम अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।
हमने व कोरोना वालंटियर ने मरीजों की मृतक देह के संस्कार तक किए लेकिन सरकार व प्रशासन ने इसका सिला नौकरी से निकाल कर दिया है। मार्च में ज्वाइनिंग करवाई और तीन माह बाद निकाल दिया गया। उन्होंने साफ कहा कि अगर उनकी सुनवाई न हुई तो वह डीसी दफ्तर में आत्मदाह कर लेंगे।