उन्होंने बताया कि नौ फरवरी को हरदीप कुमार ने बहन को बुरी तरह पीटा और फगवाड़ा के एक अस्पताल ले गया। जब वो वहां पहुंचे तो उसने बताया कि आशा रानी अस्पताल से भाग गईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर डाला तो तीसरे दिन किसी व्यक्ति ने सूचना दी कि उनकी बेटी आदमपुर में है। इसके बाद वह बहन को मायके ले आए।
आशा ने उन्हें बताया कि पति हरदीप ने उसे बुरी तरह पीटकर घर से निकाल दिया था। इसकी शिकायत उन्होंने फगवाड़ा सदर थाने में दी तो पुलिस ने हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया लेकिन आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। इसके बाद से आशा उनके साथ रह रही थी। रविवार सुबह 11 बजे हरदीप बाइक से घर आ गया।
अंदर आते ही उसने तलवार से आश रानी पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए। यह देख पिता बिशन पाल और माता दर्शना देवी बेटी को बचाने दौड़े तो आरोपी ने उन पर भी हमला कर दिया। जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। इस दौरान घर की छोटी और बड़ी बहू बाजार से घर पहुंची तो आरोपी हरदीप तलवार लेकर उनके पीछे भी भागा।
किसी तरह उन्होंने पड़ोसियों के घर में छिपकर जान बचाई। हंगामा सुनकर पहुंचे लोगों ने आरोपी हरदीप को काबू कर पुलिस के हवाले किया और बहन को सिविल अस्पताल पहुंचाया। यहां ड्यूटी पर उपस्थित डॉ. मनप्रीत बैंस ने आशा रानी को मृत बता दिया। वहीं पिता बिशन पाल व मां दर्शना रानी को होशियारपुर के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया।
वारदात की सूचना मिलते ही गढ़शंकर के एएसपी तुषार गुप्ता व माहिलपुर के एसएचओ सतविंदर सिंह धालीवाल ने वारदात स्थल का मुआयना किया। पीड़ित परिजनों ने आरोप लगाया है कि फगवाड़ा पुलिस की लापरवाही के कारण ही हरदीप कुमार की हत्या करने में सफल हुआ है।