पंजाब में बासमती वाले किसानों के चेहरे खिले हुए हैं, लेकिन मक्का किसानों के चेहरे पर मायूसी है।
मक्का के उत्पादन में कमी और बदरंग होने से किसान परेशान हैं। फसली विविधता के तहत मक्के को धान की वैकल्पिक फसल के रूप में पंजाब सरकार ने पेश किया था, लेकिन इसके प्रति किसानों का उत्साह कम हो रहा है।
पंजाब के कृषि विभाग ने इन किसानों के साथ बैठक कर कारण तलाशने और आगे से उनको और सहयोग देने पर चर्चा की है।
सूत्रों के अनुसार पंजाब सरकार ने फसली विविधता कार्यक्रम के तहत मक्का को धान की वैकल्पिक फसल के तौर पर पेश किया था।
राज्य सरकार ने खुद भी करीब 33 हजार हेक्टेयर रकबे के लिए सब्सिडी पर बीज मुहैया करवाया था।
इसके चलते मक्का के अधीन रकबा पिछले साल के 1.32 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.52 लाख हेक्टेयर हो गया था। सूत्रों के अनुसार बहुत से किसानों की मक्के का उत्पादन आठ से 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के बीच रह गया है।
हालांकि विभाग का दावा है कि औसतन उत्पादन की दर 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही है। कई किसानों को 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मक्के का उत्पादन हुआ है।
सूत्रों के अनुसार वीरवार को किसान आयोग के चेयरमैन जी.एस. कालकट, वित्तायुक्त (विकास) सुरेश कुमार ने विभाग के अधिकारियों और मक्का किसानों की बैठक में मक्का के उत्पादन पर पड़े प्रभाव को लेकर बैठक की।
बैठक में मौसम को मुख्य कारण बताया गया है।
कई विभागीय अधिकारियों का मानना है कि मक्के क ा बीज किसानों तक पहुंचाने में भी करीब एक महीने की देरी हुई और तकनीकी स्तर पर भी उचित सलाह न मिलने के कारण किसानों को नुकसान झेलना पड़ा है।
मक्का के अधीन रकबा बढ़ाना विभाग की उपलब्धि है। कुछ किसानों को कम उत्पादन मिला है। इसका मुख्य कारण मौसम है और कुछ ऐसा एरिया है जिसमें किसानों ने पहली बार मक्के की बुआई की थी।