देर रात भी उठा लेते थे फोन
गोरा पठेला ने बताया कि वे बेहद साधारण व्यक्तित्व के मालिक थे। जमीनी स्तर से उठकर वे मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे। बिल्कुल डाउन टू अर्थ इंसान थे और हर कार्यकर्ता की बात सुनते थे। हर कार्यकर्ता की छोटी से छोटी आशंका का समाधान करते थे और कार्यकर्ताओं के साथ जुड़े इंसान थे। कई बार तो देर रात को भी उन्हें फोन कर लेते थे, तो भी वे फोन उठाते थे और मजाकिया लहजे में कहते थे कि इतनी रात गए फोन किया है... क्या इमरजेंसी थी।
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी
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फोन पर लेते रहे बैठकों का रिव्यू
गोरा पठेला ने बताया कि लुधियाना में अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने मुक्तसर के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी। इसमें करीब डेढ़ घंटा वे उनके साथ थे। उनकी मौत की खबर पर यकीन नहीं हो रहा है। यही नहीं इस बैठक के बाद भी फोन पर उनकी आपस में बात हुई थी, तो उन्होंने फोन पर भी अगले दिन व आने वाली बैठकों का रिव्यू लिया था। गौरतलब है कि गिद्दड़बाहा उप चुनाव 2024 में वह मनप्रीत सिंह बादल के हक में गिद्दड़बाहा चुनावी रैली को संबोधित करने के लिए भी एक बार मुक्तसर जिले में आए थे।
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