छह अगस्त को नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन नई दिल्ली के अधिकारी बालकृष्ण गोयल, स्पेशल मॉनिटर नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन द्वारा सिविल हॉस्पिटल पठानकोट समेत कई अन्य जगह का दौरा किया गया था। सिविल हॉस्पिटल प्रबंधन को बालकृष्ण अधिकारी द्वारा साफ तौर पर निर्देश दिए गए थे कि अस्पताल में ना तो किसी की तरह बाहरी दवाई और ना ही बाहरी टेस्ट मरीजों के कोई भी डॉक्टर करवाये।
पठानकोट का सिविल अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में आया है। अस्पताल की मनोरोग चिकित्सक ने एक युवक को बाहरी दवाइयां सप्लाई करते पकड़ा और उसका वीडियो बना वायरल कर दिया है। मनोरोग चिकित्सक डॉ. सोनिया मिश्रा ने युवक पर गंभीर आरोप भी लगाए है।
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वीडियो में दिख रहा है युवक सिविल अस्पताल के एक डॉक्टर के कमरे की पिछली खिड़की के जरिए एक लिफाफा पकड़ा रहा है, जिसमें कुछ सामान था। डॉ. सोनिया मिश्रा उसकी वीडियो बनाने लगती है। उसके बाद वे उस युवक से हाय बोलती है और कहती हैं कि मैं तुम्हारी यह वीडियो सोशल मीडिया पर डालूंगी। युवक जवाब देता है कि तुम वीडियो बना रहे हो तो मैं भी वीडियो बनाता हूं और इसके बारे में सिविल सर्जन को बताता हूं कि तुम वीडियो बना रही हो। उसके बाद युवक लिफाफा डॉक्टर को पकड़ा चला जाता है।
डॉ. सोनिया ने कहा कि युवक लंबे समय से सिविल अस्पताल पठानकोट में डॉक्टरों को बाहरी दवाइयां सप्लाई कर रहा है और उन्हें भी दवाइयां लेने के लिए मजबूर करता था। उन्होंने कहा कि युवक लंबे समय से रोजाना अस्पताल में दवाईयां सप्लाई करता है और इस बारे अस्पताल प्रबंधन समेत उच्च अधिकारियों को भी पता है। अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे भी जांचे जा सकते हैं। रोजाना डॉक्टरों के कमरे में युवक का आना जाना लगा रहता है।
वहीं एसएमओ डॉ. सुनील चंद ने युवक की वायरल वीडियो पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है। एसएमओ ने कहा कि मेडिकल रिप्रेजेंटिटेव का मामला सामने आया है। इस संबंध में जांच के लिए कमेटी बनाई गई है, जो भी आरोपी पाया जाएगा उस पर बनती कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।