भाजपा चुनाव में नशे और बिगड़ी कानून-व्यवस्था के मुद्दे को पार्टी सत्तारूढ़ आप सरकार के खिलाफ बड़ा हथियार बनाने की तैयारी कर चुकी है। जालंधर पहुंचने के बाद अमित शाह सूबे के उन परिवारों के साथ आधा घंटा बिताएंगे, जिन्होंने नशे की वजह से अपने परिजनों को खोया है।
पंजाब में चुनाव से पहले नशे का कारोबार बड़ा सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। भाजपा नशे के खिलाफ यात्राएं निकालकर सूबे में विरोधियों के विरुद्ध माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने के बाद भाजपा की नशा विरोधी यात्राओं का समापन आज जालंधर में एक रैली के रूप में होगा।
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस रैली में बतौर मुख्य वक्ता भाग लेने पहुंच रहे हैं। आप सरकार उनके निशाने पर रहेगी और नशे के विरुद्ध वे पार्टी व केंद्र का रोडमैप भी पंजाबियों के समक्ष रखेंगे। आदमपुर हवाईअड्डे पर पहुंचने के बाद शाह जालंधर स्थित देवी तालाब मंदिर में दर्शन भी करेंगे और उसके बाद पंडाल पहुंचेंगे।
भाजपा की सियासी रणनीति देखें तो अबकी चुनाव में नशे और बिगड़ी कानून-व्यवस्था के मुद्दे को पार्टी सत्तारूढ़ आप सरकार के खिलाफ बड़ा हथियार बनाने की तैयारी कर चुकी है। इसी कड़ी में जालंधर पहुंचने के बाद अमित शाह सूबे के उन परिवारों के साथ आधा घंटा बिताएंगे, जिन्होंने नशे की वजह से अपने परिजनों को खोया है। इनमें वे माताएं भी होंगी, जिन्होंने नशे की वजह से अपने पांच से छह बच्चों को खो दिया है। कपूरथला व लुधियाना से जुड़ी ये घटनाएं पंजाब में बड़ी चर्चा का विषय बनी थीं।
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इसके अलावा शाह हाल ही में आत्महत्या करने वाले गुलजार सिंह के परिजनों से भी मिलेंगे। संगरूर के तुर बंजारा गांव के गुलजार सिंह ने 6 सितंबर को वित्त मंत्री के कार्यक्रम में गांव में खुलेआम चिट्टा बिकने और अपने बेटे के नशे की लत का मुद्दा उठाया था। परिवार का आरोप है कि इसके बाद उन पर माफी मांगने का दबाव बनाया गया और कथित तौर पर धमकाया गया। अगले दिन गुलजार ने जहरीला पदार्थ खा लिया और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। मरने से पहले गुलजार का आरोपियों का नाम लेते हुए वीडियो भी वायरल हुआ था।
दो साल में नशामुक्त पंजाब का दावा कर चुके शाह
शाह इसी साल 14 मार्च को मोगा के किली चाहलां में बदलाव रैली को संबोधित करने पहुंचे थे। यह भाजपा के 2027 विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत थी। शाह ने पंजाब में भाजपा की सरकार बनने का मौका देने की अपील करते हुए दावा किया था कि दो साल के भीतर पंजाब को नशामुक्त कर देंगे और नशे के कारोबार को जड़ से उखाड़ देंगे। इस दौरान उन्होंने अपराध, नशे और भ्रष्टाचार को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा था।
नशा : सियासी ही नहीं, सामाजिक मुद्दा भी
पंजाब में नशा एक दशक से ज्यादा समय से बड़ा सियासी और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है। साल 2012 के विधानसभा चुनाव से इसे प्रमुखता से उठाया जा रहा है। 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने इसे अपनी सियासत का केंद्र बनाया। 2017 में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में नशा खत्म करने के लिए चार सप्ताह का वादा किया, जबकि आप ने भी ड्रग माफिया पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया था। 2022 में आप ने फिर नशे के खिलाफ अभियान चलाया था।
शाह दें सवालों का जवाब : रंधावा
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भाजपा की नशामुक्त पंजाब यात्रा को विफल बताते हुए कहा कि पठानकोट जैसे भाजपा के गढ़ में भी यात्रा प्रभावी भीड़ नहीं जुटा सकी। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशा, गैंगस्टरवाद, ड्रोन और हथियारों से जुड़े गंभीर सुरक्षा सवालों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना चाहिए। रंधावा ने कहा, सीमा पर बीएसएफ तैनात है और इसका दायरा करीब 50 किलोमीटर तक है। बीएसएफ के रहते सीमा पार से नशा कैसे पहुंच रहा है। इसके बाद पंजाब में नशा वितरित हो रहा, इसे रोकने में पंजाब पुलिस भी फेल है।