खडूर साहिब से छह किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव जामाराय के पूर्व सैनिक लखविंदर सिंह की दो वर्ष पहले मौत हो चुकी है। उनके बड़े बेटे बहादर सिंह को डेढ़ वर्ष पहले नशे ने निगल लिया था। अब दो छोटे बेटों मलकीत सिंह और गुरप्रीत सिंह की माैत हो गई।
तरनतारन के गांव जामाराय में दो सगे भाइयों की नशे के टीके से मौत हो गई। एक वर्ष पहले दोनों के बड़े भाई बहादर सिंह की जान भी इसी तरह चली गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में नशा सरेआम बिक रहा है।
विज्ञापन
अपने दोनों जवान बेटों मलकीत सिंह व गुरप्रीत सिंह के अंतिम संस्कार के दाैरान उनकी मां रंजीत कौर ने मुख्यमंत्री को दुहाई देते कहा कि नशा खत्म करने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया जाए।
खडूर साहिब से छह किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव जामाराय की महिला सरपंच के पति परमजीत सिंह ने बताया कि पूर्व सैनिक लखविंदर सिंह की दो वर्ष पहले मौत हो चुकी है। उनके बड़े बेटे बहादर सिंह को डेढ़ वर्ष पहले नशे ने निगल लिया था। बहादर सिंह के दो भाई मलकीत सिंह और गुरप्रीत सिंह एक साथ मिलकर चिट्टे के टीके लगाते थे।
गांव तुड़ से संबंधित नामी नशा तस्कर शनिवार की शाम को दोनों भाइयों को दस हजार रुपये की हेरोइन देकर गया। मां रंजीत कौर ने बताया कि वह दुहाई देती रही कि घर का राशन लाना है, बाढ़ का भी खतरा है, लेकिन दोनों भाइयों ने एक नहीं सुनी।
दोनों ने एक-दूसरे को रात भर चिट्टे के टीके लगाए। सुबह दोनों को मृत देखकर मां रंजीत कौर बेसुध हो गई। ग्रामीण गुरशरन सिंह, केवल सिंह, हरजाप सिंह, सुलखन सिंह ने बताया कि गांव में नशा तो बिकता है, लेकिन पुलिस आंखें मूंद लेती है। शाम को दोनों भाइयों का एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। बता दें कि मलकीत सिंह शादीशुदा था और दो बेटियों का पिता भी था।