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Punjab Assembly: हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने का विरोध, डैम सेफ्टी एक्ट-2021 के खिलाफ प्रस्ताव पास

Mon, 05 May 2025 07:52 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब सरकार हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के प्रस्ताव के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाई है। मान सरकार पानी के मसले पर आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
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विधानसभा में बोलते सीएम भगवंत मान - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पंजाब और हरियाणा के बीच चल रहे पानी के विवाद के बीच पंजाब में विधानसभा के विशेष सत्र में दो अहम प्रस्ताव पास किए गए हैं। इनमें डैम सेफ्टी एक्ट को रद्द करने और हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के बीबीएमबी के फैसले के खिलाफ पर प्रस्ताव पास किए गए हैं। इससे पहले विधायक अमृत पाल सिंह सुखानंद ने बीबीएमबी द्वारा हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के फैसले की कॉपी फाड़ दी। 
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स्पीकर ने विशेष सत्र में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर निंदा जाहिर की। स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने शोक प्रस्ताव पास किया। इसके बाद सदन को 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

सदन के दोबारा शुरू होने पर जल स्रोत मंत्री बरिंद्र गोयल ने बीबीएमबी द्वारा हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने का प्रस्ताव पेश किया। सदन में डैम सेफ्टी एक्ट - 2021 को रद्द करने का प्रस्ताव पेश किया गया।

पंजाब-हरियाणा जल विवाद के बीच मान सरकार द्वारा सोमवार को बुलाए विधानसभा के विशेष सत्र में 6 अहम प्रस्तावों को सर्वसम्मति के साथ मंजूर किया गया। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में हरियाणा को 8500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी दिए जाने के बीबीएमबी बोर्ड की 23 और 30 अप्रैल को हुई बैठक में लिए फैसलों को रद्द किया गया। इसी के साथ केंद्र के डैम सेफ्टी एक्ट-2021 के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाकर सर्वसम्मति से रद्द कर केंद्र को भेजने की मंजूरी दी गई।

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जाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का एक बार फिर क्लीयर स्टैंड देखने को मिला। उन्होंने कहा कि पंजाब के पानी की रक्षा के लिए सुप्रीमकोर्ट तक लडूंगा, लेकिन एक बूंद अतिरिक्त पानी नहीं दूंगा। मान ने कहा कि बीबीएमबी सफेद हाथी है, इसे बंद करना देना चाहिए। मान ने कहा कि पंजाब के पुर्नगठन के दौरान 1966-67 में बीबीएमबी का गठन किया गया था। 1981 में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल और चंडीगढ़ के बीच पानी के बंटवारे को लेकर जो मानक तय किए गए थे, आज स्थिति उसके विपरित है।

मान ने कहा कि बीबीएमबी को बंद कर 1981 में तय हुए जल बंटवारे के मानकों को रद्द कर नये सिरे से पानी के बंटवारे को लेकर संधि तैयार की जानी चाहिए। सीएम ने तर्क दिया कि बीबीएमबी के गठन के समय पानी की स्थिति कुछ और थी, आज राज्य के भाखड़ा, रणजीत सिंह और पौंग डैम तीनों में मिलकर कुल 50 से 55 फीट पानी कम है। मान ने कहा कि रिपेरियन स्टेट के दर्जे में रावी, ब्यास और सतलुज से हरियाणा और राजस्थान का हिस्सा नहीं लगता, फिर भी इन राज्यों को पानी दिया जा रहा है। सीएम ने कहा कि नर्मदा के पानी को लेकर राजस्थान ने 1972 में मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील की थी, ऐसे में नर्मदा के पानी के लिए ट्रिब्यूनल ने उनकी अपील खारिज कर दी थी, उसके पीछे रिपेरियन स्टेट न होने का तर्क दिया गया था। सीएम ने सवाल कियाा फिर राजस्थान को पंजाब से पानी क्यों दिया जा रहा है। मान ने कहा कि सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) की जगह यमुना-सतलुज लिंक (वाईएसएल) होना चाहिए, पंजाब का युमना के पानी में हिस्सा बनता है।


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भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने हरियाणा को 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी देने की पैरवी की थी। इसके बाद दो मई को दिल्ली में हुई बैठक में केंद्रीय गृह सचिव ने पंजाब को बीबीएमबी के प्रस्ताव के अनुसार हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने का सुझाव दिया था। इसके अलावा केंद्र ने नंगल बांध (भाखड़ा बांध का कंट्रोल रूम) पर पंजाब पुलिस के पहरे पर आपत्ति जताई थी और तत्काल इसे बीबीएमबी को सौंपने को कहा था। मगर रविवार शाम तक पंजाब ने कंट्रोल रूम से नियंत्रण नहीं हटाया।  



पानी विवाद पर मान सरकार का तर्क है कि हरियाणा को जरूरत के मुताबिक 4000 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है। 8500 क्यूसेक पानी की मांग नाजायज है। अतिरिक्त पानी का उपयोग हरियाणा सिंचाई के लिए करेगा।
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पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल चीमा ने जल विवाद पर पंजाब सदन के विशेष सत्र बुलाए जाने पर कहा कि जल पंजाब की भी बहुत बड़ी जरूरत है। जब से देश आजाद हुआ है तब से लेकर अब तक केंद्र में चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो या भाजपा की, पंजाब के जल को लेकर हमेशा से ही पंजाब पर हमला किया जाता रहा है... जितना पानी हरियाणा का बनता है, उतना पानी हम हरियाणा को दे चुके हैं और उससे भी ज्यादा मानवता के नाम पर हम उन्हें 4000 क्यूसेक फीट पानी दे रहे हैं। हरियाणा में भी भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी भाजपा की सरकार है। ये दोनों सरकार पंजाब के हक को छीनना चाहती हैं लेकिन पंजाब की आप सरकार ऐसा कभी होने नहीं देगी। 
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