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एक इंजेक्शन बनेगा छह बीमारियों की ढाल: बच्चों को दर्द से मिलेगी राहत, हेक्सावेलेंट वैक्सीन दिखाएगी कमाल

Sat, 27 Jun 2026 11:58 AM IST
Nivedita वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

बच्चों के नियमित टीकाकरण को आसान और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि हेक्सावेलेंट वैक्सीन पर चल रहे अध्ययन में 99 बच्चों को ट्रायल डोज दी जा चुकी है।
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बच्चों को वैक्सीन - फोटो : IANS
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विस्तार
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अगर आपका बच्चा हर टीकाकरण पर कई इंजेक्शन लगने से रोता है तो भविष्य में यह परेशानी कम हो सकती है। एक नई वैक्सीन पर काम चल रहा है जिससे बच्चों को एक ही इंजेक्शन में छह गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिल सकेगी। 
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स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर पीजीआई में किए जा रहे ट्रायल में 99 बच्चों को सफलता पूर्वक वैक्सीन लगाई जा चुकी है और अब विशेषज्ञ उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रहे हैं।

बच्चों के नियमित टीकाकरण को आसान और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि हेक्सावेलेंट वैक्सीन पर चल रहे अध्ययन में 99 बच्चों को ट्रायल डोज दी जा चुकी है। अब इन बच्चों का नियमित फॉलो-अप किया जा रहा है ताकि यह देखा जा सके कि वैक्सीन कितनी सुरक्षित और प्रभावी है।

पेंटावेलेंट वैक्सीन पांच गंभीर बीमारियों से करती है बचाव 

डॉ. मंजीत सिंह अभी राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में बच्चों को पेंटावेलेंट वैक्सीन दी जाती है, जो पांच गंभीर बीमारियों से बचाव करती है। इसके अलावा पोलियो से अतिरिक्त सुरक्षा के लिए ओरल पोलियो ड्रॉप्स के साथ अलग से आईपीवी का इंजेक्शन भी लगाया जाता है। 

..तो भविष्य में पोलियो का इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी

नई हेक्सावेलेंट वैक्सीन में पोलियो की इंजेक्टेबल सुरक्षा भी शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि यह अध्ययन सफल रहता है तो भविष्य में बच्चों को अलग से पोलियो का इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और एक ही इंजेक्शन से छह बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा मिल सकेगी।

टीकाकरण अभियान को मिलेगी मजबूती

डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि हेक्सावेलेंट वैक्सीन से बच्चों को कम बार सुई लगानी पड़ेगी जिससे टीकाकरण के दौरान दर्द और बार-बार इंजेक्शन से संक्रमण का खतरा कम होगा। इससे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी टीकाकरण कार्यक्रम अधिक सरल और सुविधाजनक बनेगा। उन्होंने कहा कि अध्ययन में शामिल सभी 99 बच्चों का ट्रायल पूरा हो चुका है और अब उनकी नियमित निगरानी की जा रही है। अंतिम परिणाम आने के बाद ही तय होगा कि इस वैक्सीन को बड़े स्तर पर अपनाया जा सकता है या नहीं। टीकाकरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयासों को स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सराहा है और इस पर एक वैज्ञानिक लेख प्रकाशित हुआ है।
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