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चंडीगढ़: रिश्वत केस में सैनिटरी इंस्पेक्टर कोर्ट में पेश, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा; क्या बोली सीबीआई?

Thu, 08 Oct 2026 04:33 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

शिकायत मिलने के बाद सीबीआई के उपनिरीक्षक मुनीष कुमार ने आरोपों का सत्यापन किया। सीबीआई के मुताबिक, सत्यापन के दौरान शक्ति की ओर से 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और इसे स्वीकार करने की सहमति संबंधी आरोपों की पुष्टि हुई।
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सीबीआई कोर्ट में पुलिस की पेशी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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नगर निगम चंडीगढ़ के सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा को 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई ने अदालत में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सीबीआई ने शक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी पर नगर निगम के ठेकेदार से उसके बिलों के भुगतान और आगामी बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।

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सीबीआई के अनुसार, मामले की शिकायत पांच अक्तूबर को सेक्टर-50 निवासी प्रशांत भदौरिया ने की थी। वह पीपल कनेक्ट सर्विसेज नाम से फर्म चलाते हैं, जो नगर निगम के लिए जनशक्ति, जेसीबी और टिप्पर जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है। फर्म को मार्च 2026 में चंडीगढ़ की विभिन्न लैंडफिलिंग साइट पर अर्थमूवर सेवाएं उपलब्ध कराने का तीन साल का ठेका मिला था। फर्म के हर महीने करीब 10 लाख रुपये के बिल बनते थे।

जुलाई 2025 से रिश्वत मांगने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति जुलाई 2025 से लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था। सितंबर 2026 में लंबित भुगतान और जेसीबी-टिप्पर की उपस्थिति संबंधी विवरण के सिलसिले में मुलाकात के दौरान शक्ति ने कथित तौर पर जुलाई 2025 से जुलाई 2026 तक हर महीने एक लाख रुपये के हिसाब से 14 लाख रुपये मांगे।

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शिकायत में आरोप लगाया गया कि रिश्वत नहीं देने पर लंबित बिलों को आगे नहीं बढ़ाने और फर्म का ठेका रद्द कराने की धमकी दी गई। शक्ति ने कथित तौर पर यह भी बताया कि रिश्वत की रकम नगर निगम के अन्य अधिकारियों के बीच बांटी जानी थी। 

सीबीआई के सत्यापन में आरोप प्रथम दृष्टया सही
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई के उपनिरीक्षक मुनीष कुमार ने आरोपों का सत्यापन किया। सीबीआई के मुताबिक, सत्यापन के दौरान शक्ति की ओर से 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और इसे स्वीकार करने की सहमति संबंधी आरोपों की पुष्टि हुई। बातचीत की रिकॉर्डिंग में भी रिश्वत की रकम को अन्य निगम अधिकारियों के बीच बांटने के संदर्भ मिलने की बात कही गई है। 

इसके बाद सीबीआई एसीबी चंडीगढ़ ने सात अक्तूबर को नियमित मामला दर्ज किया और जांच निरीक्षक अरुण अहलावत को सौंप दी। एफआईआर में कहा गया है कि मामले की जांच के दौरान नगर निगम के अन्य अधिकारियों की भूमिका भी देखी जाएगी। अब आरोपी शक्ति शर्मा को अदालत से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद सीबीआई की जांच आगे बढ़ेगी। जांच एजेंसी रिश्वत की कथित मांग में अन्य अधिकारियों की भूमिका और रकम के बंटवारे से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल कर सकती है।
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