फिरोजपुर के सीमावर्ती गांव कालू वाला में स्कूल की छत पर टेंट लगाकर बनाई रसोई
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सरकार हमें सुरक्षित स्थान पर दस-दस मरले जमीन दें ताकि हम अपने बच्चों के साथ सतलुज दरिया के पानी की मार से दूर रह सकें। हम हर साल दरिया की मार झेलते हैं। यह कहना है कि बाढ़ प्रभावित टापू कालू वाला निवासी लखविंदर सिंह व सुरजीत सिंह का।
उनका कहना है कि यहां के लोगों की जिंदगी नरक बन चुकी है। हर साल दरिया में आई बाढ़ उन्हें नुकसान पहुंचती है। सुरजीत सिंह का कहना है कि अभी वर्ष 2023 में आई बाढ़ के जख्म भरे भी नहीं थे कि अब फिर से बाढ़ ने उन्हें बर्बाद कर दिया।
उस समय बाढ़ से उनके खेतों में आठ ऊंचे रेत के टीले बन गए थे। बड़ी मुश्किल से ट्रैक्टरों के जरिये रेत को साफ करके खेती लायक जमीन तैयार की थी। अब उनकी मेहनत बाढ़ में बह गई है। अब उन्हें सहायता की दरकार व उम्मीद है।
ग्रामीण मक्खन सिंह, जरनैल सिंह व जस्सा ने बताया कि वे पिछले 15 दिन से पानी के बीच में रह रहे हैं। स्कूल की छत के ऊपर टेंट लगाकर खाना बना रहे हैं। कालू वाला में ही उन्होंने अपने पशु रखे हुए हैं। कुछ पशु बाढ़ में मर भी गए हैं।