पुलिस के साइबर सेल ने सोशल मीडिया पर गंदे कंटेंट या रील बनाकर डालने वालों से जुड़े 123 अकाउंट्स की लिस्ट तैयार की है। इसमें पंजाब के कई नामी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जिनके सोशल मीडिया अकाउंट की अब साइबर सेल निगरानी कर रहा है।
पंजाब के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अब पुलिस की नजर में हैं। सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट डालने वालों के अब अकाउंट बंद किए जाएंगे। इसको लेकर पुलिस के साइबर सेल ने इन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों के अकाउंट की मॉनिटरिंग बढ़ा दी है।
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साइबर सेल की एडीजीपी वी. नीरजा ने बताया कि बीते दो साल में पुलिस ने सोशल मीडिया पर 8 हजार से अधिक आपत्तिजनक पोस्ट डिलीट कराए हैं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के गंदे कंटेंट को लेकर अब साइबर सेल अकाउंट्स की निगरानी कर रही है। यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर अकाउंट्स बनाकर रील या गंदे कंटेंट पोस्ट करने वाले इन अकाउंट्स की लिस्ट तैयार की जा रही है।
पुलिस के साइबर सेल ने सोशल मीडिया पर गंदे कंटेंट या रील बनाकर डालने वालों से जुड़े 123 अकाउंट्स की लिस्ट तैयार की है। इसमें पंजाब के कई नामी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जिनके सोशल मीडिया अकाउंट की अब साइबर सेल निगरानी कर रहा है। इन 123 सोशल मीडिया अकाउंट्स को लेकर पुलिस के पास अलग-अलग संगठनों की ओर से शिकायतें भी आई हैं, जिस पर अब साइबर सेल इन अकाउंट्स को बंद कराने की तैयारी में है। अगर इन अकाउंट्स पर वलर्ग कंटेंट डिलीट नहीं किया जाता है, तो पुलिस के आईटी एक्ट के तहत स्पेशल पावर है, जिसके तहत वह इन अकाउंट्स को ब्लॉक कर सकती है।
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सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर पुलिस के पास ये विशेष अधिकार
साइबर सेल एडीजीपी वी नीरजा ने बताया कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्टों को हटवाने के लिए साइबर सेल के माध्यम से यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स को नियमित रूप से रिपोर्ट करती है। यदि ये प्लेटफॉर्म समय पर कार्रवाई नहीं करते, तो उनकी सेफ हार्बर सुरक्षा हटा दी जाती है। धारा 79 आम तौर पर सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर द्वारा अपलोड की गई सामग्री के लिए कानूनी जिम्मेदारी से छूट देती है। लेकिन धारा 79(3)(बी) के तहत अगर किसी पोस्ट की अवैधता की जानकारी या सरकारी नोटिस के बावजूद जैसे फेसबुक, यूट्यूब आदि समय पर उस कंटेंट को नहीं हटाते, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा यदि सरकार के निर्देशों की अवहेलना होती है तो आईटी एक्ट की धारा 67ए भी लागू की जा सकती है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा दखल दिया जाता है।