पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने तीन सदस्यीय पर्यवेक्षक समिति को जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन दिल्ली में चल रही बैठकों से मतभेद और खुलकर सामने आ गए हैं।
पीपीसीसी के पूर्व अध्यक्ष शमशेर सिंह दूलो ने कहा कि चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदलना पार्टी के हित में नहीं होगा। उनका मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन से संगठन को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को ऐसा चेहरा आगे करना चाहिए जिस पर कोई मामला न चल रहा हो।
कुछ सप्ताह पहले राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में भी पंजाब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच तीखी बहस सामने आई थी। ऐसे में पर्यवेक्षक समिति की कवायद से गुटबाजी कम होने की बजाय और सतह पर आती दिख रही है।
तीन सदस्यीय पर्यवेक्षक समिति 19 जून को अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप सकती है। रिपोर्ट में संगठन की स्थिति, नेतृत्व को लेकर नेताओं की राय और चुनावी तैयारियों से जुड़े सुझाव शामिल होने की संभावना है। इसके बाद हाईकमान पंजाब कांग्रेस को लेकर अहम फैसला ले सकता है।