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पंजाब कांग्रेस में कलह बरकरार: दिल्ली बैठकों से और उभरे मतभेद, एक राय बनने के बजाय बढ़ रही खींचतान

Fri, 19 Jun 2026 11:51 AM IST
Nivedita सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के 66 नेताओं को दिल्ली बुलाकर उनसे वन-टू-वन बातचीत की है। बैठकों का उद्देश्य संगठन की स्थिति का आकलन करना और चुनावी रणनीति तैयार करना है। हालांकि नेताओं ने पर्यवेक्षकों के सामने अलग-अलग राय रखकर गुटबाजी की तस्वीर और स्पष्ट कर दी है।
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अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने तीन सदस्यीय पर्यवेक्षक समिति को जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन दिल्ली में चल रही बैठकों से मतभेद और खुलकर सामने आ गए हैं। 

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विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की नब्ज टटोलने और नेताओं के बीच तालमेल बढ़ाने की कवायद फिलहाल सफल होती नहीं दिख रही।

हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के 66 नेताओं को दिल्ली बुलाकर उनसे वन-टू-वन बातचीत की है। बैठकों का उद्देश्य संगठन की स्थिति का आकलन करना और चुनावी रणनीति तैयार करना है। हालांकि नेताओं ने पर्यवेक्षकों के सामने अलग-अलग राय रखकर गुटबाजी की तस्वीर और स्पष्ट कर दी है।

सूत्रों के अनुसार कई नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व का समर्थन किया, जबकि कुछ नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव के लिए बेहतर चेहरा बताया। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के पक्ष में भी कई नेताओं ने राय रखी। इससे किसी एक नाम पर सहमति बनने के बजाय मतभेद और उभरकर सामने आए हैं।
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पार्टी के भीतर विवाद केवल नेतृत्व तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री चेहरे, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन, संगठनात्मक फेरबदल तथा टिकट वितरण जैसे मुद्दों पर भी अलग-अलग गुट सक्रिय हैं। कई नेताओं ने यह भी सुझाव दिया कि चुनाव में ऐसा चेहरा आगे लाया जाए जिस पर किसी प्रकार का मामला न हो।

दूलो बोले, अध्यक्ष बदलने का समय नहीं

पीपीसीसी के पूर्व अध्यक्ष शमशेर सिंह दूलो ने कहा कि चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदलना पार्टी के हित में नहीं होगा। उनका मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन से संगठन को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को ऐसा चेहरा आगे करना चाहिए जिस पर कोई मामला न चल रहा हो।

कुछ सप्ताह पहले राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में भी पंजाब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच तीखी बहस सामने आई थी। ऐसे में पर्यवेक्षक समिति की कवायद से गुटबाजी कम होने की बजाय और सतह पर आती दिख रही है।

19 जून की रिपोर्ट पर नजर

तीन सदस्यीय पर्यवेक्षक समिति 19 जून को अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप सकती है। रिपोर्ट में संगठन की स्थिति, नेतृत्व को लेकर नेताओं की राय और चुनावी तैयारियों से जुड़े सुझाव शामिल होने की संभावना है। इसके बाद हाईकमान पंजाब कांग्रेस को लेकर अहम फैसला ले सकता है।

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