11 महीने से चल रहा किसान आंदोलन
एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी समेत कईं मांगों को लेकर किसानों ने पटियाला के शंभू बार्डर पर 13 फरवरी को आंदोलन 2.0 शुरू किया। इसे शुरू हुए आज करीब 11 महीने हो चुके हैं। इस दौरान दिल्ली कूच की कोशिश कर रहे किसानों व हरियाणा पुलिस प्रशासन के बीच कईं बार टकराव भी हो चुका है। इसमें एक नौजवान की मौत भी हुई है।
तीन बार दिल्ली कूच की कोशिश कर चुके किसान
सुप्रीम कोर्ट भी लगातार इस मामले पर अपनी टिप्पणी देने के अलावा पंजाब व केंद्र सरकारों को आदेश जारी कर रही है। इसी महीने दिसंबर में किसानों ने तीन बार शंभू बॉर्डर के जरिये दिल्ली कूच के लिए रवानगी की। 101 किसानों का मरजीवड़ा जत्था पहले छह तारीख को, फिर आठ को और इसके बाद 14 दिसंबर को दिल्ली कूच के लिए रवाना हुआ। किसानों को रोकने के लिए हरियाणा की तरफ से आंसू गैस के गोलों, वाटर कैनन बगैरा का इस्तेमाल भी किया गया। कईं किसान इस टकराव में घायल भी हुए। लेकिन अभी भी किसानों के हौंसले बुलंद हैं और हाड कंपा देने वाली इस ठंड में भी किसान शंभू व खन्नौरी बार्डरों पर डटे हैं। किसानों का रूख साफ है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होगी, बार्डरों से हटेंगे नहीं। फिर चाहे इसमें कितना ही समय और कितनी ही कुर्बानियां क्यों न देनी पड़ें।