पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी के बीच कई शहरों की हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। वीरवार को जारी वायु गुणवत्ता के आंकड़ों के अनुसार पटियाला 240 एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के साथ प्रदेश में सबसे प्रदूषित शहर रहा। खन्ना में 230 और लुधियाना में 218 एक्यूआई दर्ज किया गया।
इसके अलावा जालंधर में 178, मंडी गोबिंदगढ़ में 168 और अमृतसर में 154 एक्यूआई रहा। पटियाला, खन्ना और लुधियाना में एक्यूआई 200 से ऊपर पहुंचने के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
एक दिन में पराली जलाने के 440 मामले
पंजाब में वीरवार को पराली जलाने के 440 सक्रिय मामले दर्ज किए गए। पिछले साल इसी तारीख को 94 और 2024 में 361 मामले सामने आए थे। हालांकि, 15 सितंबर से पांच नवंबर तक इस सीजन में कुल 2787 सक्रिय आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 2933 और 2024 में 4755 मामले थे।
संगरूर में सबसे ज्यादा घटनाएं
जिला स्तर पर पांच नवंबर को संगरूर में सबसे अधिक 77 मामले सामने आए। बठिंडा में 49, पटियाला में 46, फिरोजपुर में 45, बरनाला में 33 और तरनतारन में 28 मामले दर्ज किए गए। पूरे सीजन में तरनतारन 586 मामलों के साथ पहले स्थान पर है। फिरोजपुर में 361 और संगरूर में 240 मामले सामने आए हैं।
40.37 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार अत बक 1942 खेतों का निरीक्षण किया गया, जिनमें 868 जगह पराली जलाने की पुष्टि हुई। 647 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई, जबकि 723 खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई। दोषियों पर कुल 40.37 लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 23.05 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं। इसके अलावा 689 चेतावनी और कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
पटियाला में 67 खेतों के निरीक्षण के दौरान 24 जगह पराली जलाने की पुष्टि हुई। यहां 80 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 35 हजार रुपये वसूले गए। वहीं, 21 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है।