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पंजाब में आप के तीन विधायक टूटे: कामकाज और टिकट पर असंतोष, भरोसा कायम रखना और चुनावी नैरेटिव बचाने की चुनौती

Wed, 04 Nov 2026 09:53 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

आम आदमी पार्टी के तीनों नेताओं की नाराजगी के कारण अलग-अलग हैं लेकिन उनके पार्टी छोड़ने से सरकार के कामकाज, नेतृत्व की कार्यशैली और आगामी चुनाव में टिकट वितरण को लेकर असंतोष का मुद्दा विपक्ष के हाथ लग गया है।
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भगवंत मान - फोटो : X @BhagwantMann
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विस्तार
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पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) के तीन विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी में सियासी हलचल तेज हो गई है। आप के समक्ष अब अपने विधायकों का भरोसा कायम रखने और चुनावी नैरेटिव बचाने की कड़ी चुनौती है। दलबदल के इस घटनाक्रम से निश्चित तौर पर सियासी समीकरण भी बदलेंगे।
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यह घटनाक्रम राज्य में भाजपा की चुनावी रणनीति और आप के अंदरूनी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटनाक्रम से जहां भाजपा को मालवा और माझा में अपने राजनीतिक विस्तार के लिए तीन स्थानीय चेहरे मिले हैं, वहीं सत्तारूढ़ आप को भी अब सियासी बिसात पर सधी चाल के साथ आगे बढ़ना होगा।

खास बात यह है कि तीनों नेताओं की नाराजगी के कारण अलग-अलग हैं लेकिन उनके पार्टी छोड़ने से सरकार के कामकाज, नेतृत्व की कार्यशैली और आगामी चुनाव में टिकट वितरण को लेकर असंतोष का मुद्दा विपक्ष के हाथ लग गया है।
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दरअसल, तीनों विधायकों का राजनीतिक प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में है। समाना के चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर के हरमीत सिंह पठानमाजरा के जरिये भाजपा को पटियाला जिले में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। वहीं, अमृतसर उत्तरी के कुंवर विजय प्रताप सिंह के जरिये पार्टी माझा में अपनी राजनीतिक उपस्थिति का विस्तार करने की कोशिश करेगी। तीनों नेता 2022 में आप के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

पहली सूची के बाद से हलचल तेज
आप ने कुछ दिन पहले ही विधानसभा चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है, जिसके बाद से सियासी हलचल तेज हो गई है। आप के कुल 94 विधायकों में से सिर्फ 40 के नामों की घोषणा की गई है। इनमें मुख्यमंत्री समेत केवल एक मंत्री का नाम शामिल है। इसके बाद से ही टिकट के दावेदार मौजूदा विधायकों और मंत्रियों में असमंजस बढ़ गया है।

हालांकि, आप के प्रदेशाध्यक्ष अमन अरोड़ा दावा कर रहे हैं कि तीनों विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पहले ही हाशिये पर कर दिया गया था। इनमें से दो विधायक तो पार्टी से निलंबित थे। ऐसे में इन विधायकों के भाजपा में शामिल होने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आप सरकार अपने कामकाज और उपलब्धियों के आधार पर दोबारा जनादेश मांगने चुनावी मैदान में उतरेगी। उधर, भाजपा और कांग्रेस दावा कर रहे हैं कि आप के कई विधायक और मंत्री अभी और टूटेंगे। दोनों दलों का कहना है कि ऐसे नेता उनके संपर्क में हैं।
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