उत्तर भारत में निर्माण श्रमिक, राजमिस्त्री, कारपेंटर व ड्राइवरों में भी दूसरों के मुकाबले फेफड़ों के कैंसर के मरीज अधिक बढ़ रहे हैं। धूल, रसायन के साथ वायु प्रदूषण के कारण इनमें कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। साथ ही धूम्रपान का ट्रेंड बढ़ने के कारण महिला कैंसर भी बढ़ रहे हैं। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
पीजीआई के विशेषज्ञों की टीम ने 1,689 फेफड़ों के कैंसर के मरीजों पर यह स्टडी की गई। ये मरीज अप्रैल 2017 से दिसंबर 2019 के बीच पंजीकृत किए गए थे। इनमें 1,352 पुरुष और 337 महिलाएं शामिल थीं। स्टडी के अनुसार निर्माण स्थल पर काम करने वाले श्रमिक या मजदूरों में फेफड़े के कैंसर मामलों में वृद्धि देखी गई है। इसी तरह धूम्रपान से सबसे अधिक फेफड़ों के कैंसर का जोखिम रहता है। 74.2% रोगी धूम्रपान करने वाले थे, जिनमें से 91.5% पुरुष और 8.5% महिलाएं थीं।
धूम्रपान करने वालों और धूम्रपान न करने वालों का अनुपात 3:1 था। 1301 रोगियों से जुड़ी पिछली स्टडी में यह देखा गया कि अधिकतम रोगी (82.3%) पुरुष थे। इसमें धूम्रपान करने वाले व छोड़ चुके पुरुषों का प्रतिशत 76.9% था। वहीं वर्तमान स्टडी में पुरुष रोगियों की संख्या में मामूली कमी (80%) और महिला रोगियों में इसी अनुपात में वृद्धि देखी गई है। इसी तरह किसानों में फेफड़ों के कैंसर बढ़ने का कारण कृषि में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों का लंबे समय तक संपर्क, धूल, जानवरों के वायरस, ईंधन, उर्वरक आदि शामिल हैं। डॉ. नवनीत सिंह, सुरेंद्र पॉल और प्रोफेसर रविंद्र खैवाल के नेतृत्व में टीम ने यह स्टडी रिपोर्ट तैयार की है।
बायोमास ईंधन (बीएसएफ) भी कैंसर का प्रमुख कारण
स्टडी में सामने आया है कि बायोमास ईंधन (बीएसएफ) भी कैंसर का प्रमुख कारण बन रहा है। इसी तरह घरों में इस्तेमाल एलपीजी गैस से भी खतरा बढ़ रहा है। वर्तमान स्टडी में दर्ज अधिकतम मरीजों के घरों में खाना पकाने के ईंधन के रूप में एलपीजी और बीएसएफ दोनों का उपयोग किया जाता है। 46.1% घर खाना पकाने के ईंधन के रूप में एलपीजी का उपयोग करते हैं, इसके बाद 44.4% मिश्रित प्रकार, 8.8% लकड़ी और 0.7% अन्य का उपयोग होता है।
व्यवसाय के अनुसार 43.3% मरीज बाहरी परिस्थितियों में काम करते हैं, जबकि 31.1% घर के अंदर के वातावरण में काम करते हैं। इसी तरह मरीजों में 21.2% किसान और 16.3% गृहणियां भी शामिल थी। वायु प्रदूषण के कारण भी फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ रहा है। स्टडी में रोगियों के लिए घरेलू परिस्थितियों और व्यवसाय का भी आंकलन किया गया। 69.6% रोगी कंक्रीट के घरों में रहते थे और 88.3% घरों में अच्छा वेंटिलेशन था।
निर्माण श्रमिक, राजमिस्त्री, कारपेंटर व ड्राइवरों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। साथ ही वायु प्रदूषण में कैंसर का प्रमुख कारण बन रहा है, जबकि महिलाओं में धुम्रपान के बढ़ते ट्रेंड के कारण उनमें कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। -रविंद्र खैवाल, प्रोफेसर, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, पीजीआई।