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एमडीआर शुल्क: पेट्रोल पंप डीलर्स की सरकार को चेतावनी, फैसला वापस ना लिया तो कर सकते हैं देशव्यापी हड़ताल

Wed, 14 Oct 2026 06:14 PM IST
शाहिल शर्मा पीटीआई, चंडीगढ़

सार

पेट्रोल पंप डीलरों और व्यापारिक संगठनों ने पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर डिजिटल भुगतान के लिए लगाए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क से पूरी तरह छूट देने की मांग की है।
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पेट्रोल पंप - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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पेट्रोल पंप डीलरों और व्यापारिक संगठनों ने पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर डिजिटल भुगतान के लिए लगाए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क से पूरी तरह छूट देने की मांग की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो दिवाली के बाद देशव्यापी हड़ताल पर जाने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। डीलरों ने कम मार्जिन, बढ़ती परिचालन लागत और कर्ज के बढ़ते बोझ को लेकर भी चिंता जताई है।

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बुधवार को राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स, पेट्रोलियम पंप डीलर्स एसोसिएशन पंजाब और पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के पदाधिकारियों ने इन मुद्दों को उठाया। संयुक्त रूप से अपनी चिंताएं रखते हुए संगठनों ने कहा कि सरकार की डिजिटल लेन-देन संबंधी फीस और डीलरों को मिलने वाला अपर्याप्त मार्जिन खुदरा ईंधन कारोबार पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहे हैं।

दो हजार से अधिक के डिजिटल भुगतान पर एमीडआर शुल्क का विरोध
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोंटी सहगल ने कहा कि डिजिटल भुगतान पर एमडीआर शुल्क लागू करने के फैसले को दिवाली तक अस्थायी रूप से टाल दिया गया है, लेकिन इसे लागू करने की योजना अभी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाने के फैसले को फिलहाल स्थगित किया गया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया  ने मंगलवार को कहा था कि इसे लागू करने की नई तारीख दिवाली के बाद तय की जाएगी।
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हरियाणा फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष गुलशन डांग के अनुसार, पेट्रोलियम समेत कुछ विशेष श्रेणियों के कारोबारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर प्रति लेनदेन पांच रुपये का निश्चित एमडीआर शुल्क लागू करने का प्रावधान है।
 
मोंटी सहगल ने कहा कि पेट्रोलियम डीलरों का मार्जिन निर्धारित और नियंत्रित होता है। ऐसे में वे डिजिटल लेनदेन की अतिरिक्त लागत खुद वहन करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों और खुदरा डीलरों को सभी एमडीआर शुल्कों से 100 प्रतिशत छूट देने की मांग की।

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डीलर मार्जिन बढ़ाकर 7 प्रतिशत करने की मांग
पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के अध्यक्ष संजीव चौधरी ने कहा कि देशभर में पेट्रोल पंप संचालक गंभीर आर्थिक संकट और भारी कर्ज के दबाव का सामना कर रहे हैं। उनके अनुसार, डीलर मार्जिन में 2017 में संशोधन किया गया था और नवंबर 2024 के अंत में इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई, लेकिन यह मौजूदा खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।संगठनों के मुताबिक, डीलरों को मिलने वाले मार्जिन का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, बिजली बिल, पूंजी निवेश पर बढ़ते बैंक ब्याज और तेल विपणन कंपनियों की ओर से अनिवार्य अनुपालन संबंधी खर्चों में चला जाता है।

 संजीव चौधरी ने कहा कि नवंबर 2024 में हुई मामूली बढ़ोतरी से महंगाई के कारण बढ़े खर्चों की भरपाई नहीं हो सकी। खासकर हर महीने 100 किलोलीटर से कम ईंधन बेचने वाले छोटे डीलरों को इसका लगभग कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला। संगठनों ने केंद्र सरकार और तेल विपणन कंपनियों से डीलर मार्जिन बढ़ाकर बिल की कुल राशि का 7 प्रतिशत करने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से छोटे पेट्रोल पंप संचालकों को राहत देने की अपील की। 

पेट्रोल पंपों की संख्या बढ़ी, बिक्री में आई गिरावट
पेट्रोलियम पंप डीलर्स एसोसिएशन पंजाब के अध्यक्ष परमजीत सिंह दोआबा ने कहा कि वर्ष 2018 और 2023 में पेट्रोल पंपों के विस्तार के बाद देश में इनकी कुल संख्या एक लाख से अधिक हो गई है। इससे प्रति पेट्रोल पंप औसत मासिक बिक्री घटकर पहले के 170 किलोलीटर से लगभग 130 से 140 किलोलीटर रह गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में स्थिति और गंभीर है। यहां कई पेट्रोल पंपों की औसत मासिक बिक्री 100 किलोलीटर से भी नीचे आ गई है। इससे अनेक संचालकों के लिए कारोबार जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है।
 
संगठनों ने केंद्र सरकार, तेल विपणन कंपनियों और पंजाब-हरियाणा सरकारों से मांग की है कि डिजिटल भुगतान शुल्क, डीलर मार्जिन और कर दरों से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। संजीव चौधरी ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर दिवाली के बाद देशव्यापी हड़ताल पर विचार किया जा सकता है।
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