पठानकोट के कर्नल भानू प्रताप सिंह महज 33 साल की उम्र में देश के लिए बलिदान हो गए।पठानकोट के अबरोल नगर निवासी सेना की 14 हॉर्स रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल भानू प्रताप सिंह जम्मू-कश्मीर के लद्दाख के साथ लगते भारत-चीन बॉर्डर पर तैनात थे।
भारत-चीन बॉर्डर पर लद्दाख सीमा पर बुधवार को बड़ा हादसा हुआ। गलवान के चारबाग इलाके में सेना के वाहन पर एक विशाल चट्टान गिरने से सेना के दो जवान बलिदान हो गए। इनमें पठानकोट के लेफ्टिनेंट कर्नल भानु प्रताप सिंह भी शामिल हैं। इस दर्दनाक दुर्घटना में दो अन्य सैनिक भी घायल हो गए हैं।
विज्ञापन
पठानकोट के वीर सपूत 33 वर्षीय लेफ्टिनेंट कर्नल भानू प्रताप सिंह मनकोटिया बुधवार सुबह फायरिंग रेंज पर जाते समय लैंड स्लाइडिंग की वजह से बलिदान हो गए। पठानकोट के अबरोल नगर निवासी सेना की 14 हॉर्स रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल भानू प्रताप सिंह जम्मू-कश्मीर के लद्दाख के साथ लगते भारत-चीन बॉर्डर पर तैनात थे।
जून में प्रमोट होकर लेफ्टिनेंट बने थे भानू प्रताप सिंह
जैसे ही लेफ्टिनेंट कर्नल भानू प्रताप सिंह मनकोटिया के बलिदान की खबर परिजनों को मिली तो उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिता रिटायर्ड कर्नल आरपीएस मनकोटिया, माता सुनीता मनकोटिया व पत्नी तारिणी गहरे सदमे में हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल भानू प्रताप सिंह बहुत ही बहादुर और होनहार सैन्य अधिकारी थे। बीते महीने जून में ही वे प्रमोट होकर लेफ्टिनेंट कर्नल बने थे। आईएमए में बेस्ट कैडेट के तौर पर इन्हें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर व गोल्ड मेडल से सम्मानित भी किया गया था। भानू प्रताप सिंह के बेटे के पिता थे। उनका डेढ़ साल का इकलौता बेटा व्योम है।
विज्ञापन
वीरवार को होगा अंतिम संस्कार
इस अवसर पर शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने बताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल भानू प्रताप सिंह मनकोटिया की पार्थिव शरीर वीरवार को पठानकोट पहुंचेगा। जहां जालंधर बाईपास चक्की पुल के नजदीक बने श्मशानघाट पर पूरे सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार किया जाएगा।