आई डोनेशन के मामले में मुक्तसर की आई डोनेशन सोसायटी प्रदेश में पहले स्थान पर है और संस्था द्वारा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान जहां कहीं से कोई डॉनर आंखें दान करता है, वहां से यह आंखें पास के जरुरतमंद को लगवाई जाती हैं और सारा खर्च संस्था वहन करती है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद फ्लाइट कैंसल होने के बाद मुक्तसर की आई डोनेशन सोसायटी ने चंडीगढ़ के जरूरतमंदों की मदद का फैसला लिया है। मुक्तसर की आई डोनेशन सोसायटी द्वारा स्थानीय आई डोनर की दान की आंखें श्रीनगर भेजी जानी थी, जो फ्लाइटें उड़ान न भरने के चलते अब चंडीगढ़ के जरुरतमंदों की जिंदगी रोशन करेंगी।
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बुधवार को अमर उजाला के साथ बातचीत में पटियाला आई हॉस्पिटल के डॉ. युवराज मार्कन, सोसायटी के अध्यक्ष कृष्ण कुमार शम्मी तेरिया, महा सचिव सुरिंदर सिंह चगती ने बताया कि सोसायटी पिछले 25 वर्षों से मुक्तसर के आस-पास के क्षेत्रों से दानी सज्जनों के सहयोग से आंखें दान करने की मुहिम चला रही है। उनकी संस्था को श्रीनगर से भी मांग आने लगी है। इसी क्रम में आज श्रीनगर के किसी जरुरतमंद के लिए आंखें भेजी जा रही थीं, मगर चंडीगढ़ में एयरपोर्ट सील होने व श्रीनगर में भी फ्लाइटें रद्द होने के कारण जरुरतमंद को आंखें न भेजी जा सकी।
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24 घंटे के बाद आंखें खराब होने के कारण अब यह आंखें चंड़ीगढ़ में ही किसी जरुरतमंद को लगाई जाएंगी। सोसायटी के उप महा सचिव मास्टर जसपाल सिंह, कैशियर मनोहर सिंह कुंदन, सुरिंदर खेड़ा, संजीव खेड़ा ने बताया कि सोसायटी द्वारा 25 वर्षों में अब तक 1,242 लोगों की आंखें रोशन की जा चुकी हैं। जबकि अप्रैल माह में ही 26 लोगों को आंखें लगाकर उनकी जिंदगियों में उजाला किया गया है। क्षेत्रवासियों के सहयोग से यह सेवा का कार्य आगामी समय में भी इसी तरह जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि इस नेक कार्य में सबसे अहम भूमिका मलोट निवासी युवा मोनू निभा रहा है, जो यह आंखें लेकर जरुरतमंद तक लगाने के लिए पहुंचाने का कार्य करता है।
अब कश्मीर व श्रीनगर में भी संस्था को आंखों की मांग बढ़ी है। फिलहाल तनाव भरे माहौल के चलते फ्लाइटें रद्द होने के कारण श्रीनगर के जरुरतमंद के लिए आंखें न जा सकीं, मगर आने वाले समय में वे वहां के अस्पताल प्रबंधकों के संपर्क में हैं और उन्हें आंखें भेजते रहेंगे।