मोगा के धर्मकोट क्षेत्र के गांव जलालाबाद से चिट्टे की नशे के कारण एक परिवार का चिराग बुझने का दुखद मामला सामने आया है। 22 वर्षीय जसकरण सिंह की 21 सितंबर को मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि जसकरण पिछले करीब 10 वर्षों से नशे की गिरफ्त में था और नशा नहीं मिलने के कारण उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। मृतक जसकरण सिंह अपने माता-पिता का बड़ा बेटा था। छोटा भाई भी इस नशे की गिरफ्त में फंसा हुआ है।
जसकरण मजदूरी करके जो भी पैसे कमाता था, उनका इस्तेमाल नशे के लिए कर देता था। नशे के लिए पैसे नहीं मिलने पर वह घर का सामान तक बेच देता था। परिजनों का आरोप है कि जसकरण घर की एलसीडी, मोटरसाइकिल, पंखे, बर्तन और यहां तक कि अपनी मां के कपड़े भी बेच चुका था। माता-पिता ने अपने दोनों बेटे को नशे के दलदल से बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किया।
उन्होंने कर्ज लेकर दोनों बेटे को नशा प्राइवेट नशा छुड़ाओ केंद्र में भर्ती करवाया, ताकि नशा छोड़कर सामान्य जिंदगी जी सके। छोटा बेटा तो इस नशे की गिरफ्त से बाहर आ गया। परिवार ने हर महीना 12 हजार भर कर प्राइवेट नशा छुड़ाओ केंद्र की फीस देते रहे। जसकरण छह महीने तक वहां रहा, लेकिन लौटने के बाद भी वह लत से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया। पिछले कुछ दिनों से जसकरण को नशा नहीं मिल पा रहा था, जिसके चलते उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। उन्होंने कहा कि उनके पास बेटे को अस्पताल ले जाने के लिए भी पैसे नहीं थे। लोगों से पैसा मांगकर अस्पताल लेकर गए पर आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।
बड़े बेटे की मौत के बाद माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने पंजाब सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि गांव और आसपास के इलाकों में नशे की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जाए और युवाओं को नशे के चंगुल से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। परिजनों ने कहा कि उनका बेटा तो चला गया, लेकिन वे नहीं चाहते कि गांव का कोई और परिवार नशे के कारण अपना बेटा खोए। उन्होंने सरकार से गांव में नशे के खिलाफ जल्द और सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
मृतक के पिता सिकंदर सिंह ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। जसकरण सिंह उनका बड़ा बेटा था। मृतक के पिता सिकंदर सिंह ने सरकार से अपील की कि उनके गांव में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और गांव से नशे का खात्मा किया जाए, ताकि किसी और परिवार के घर का चिराग न बुझे।
मृतक की मां ने बताया कि गांव में चीनी की तरह चिट्टा आसानी से मिल रहा है। केवल उनका बेटा ही नहीं, बल्कि आसपास के करीब 10-12 अन्य नौजवान भी इस नशे की गिरफ्त में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस नशे को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए, वरना आने वाले समय में किसी भी घर का चिराग सुरक्षित नहीं रहेगा।
उन्होंने भावुक होकर कहा कि आज जिस तरह एक मां अपने बेटे को खोकर रो रही है, नशे की वजह से कई अन्य माताएं भी इसी तरह रो रही हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की कि गांवों में चिट्टे की बिक्री पर तुरंत रोक लगाई जाए और नशे को जड़ से खत्म किया जाए।
इस मामले में थाना धर्मकोट ने एसएचओ जितेंदर सिंह ने बताया कि नौजवान की मौत के कारण अभी साफ नहीं हो पाया किस कारण मौत हुई है। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के कारण पता लगेगा।