ऐसा खेला खेल, रडार पर अफसर
सूत्रों ने बताया कि पंजाब के अफसरों, बिचौलियों और निजी एजेंसियों ने मिलीभगत कर सरकार को बड़ी चपत लगाई है। ईडी की जांच में पंजाब के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और बिचौलियों की संदिग्ध भूमिका भी उजागर हुई है। सूत्र बताते हैं कि एक वरिष्ठ अफसर के मोबाइल से एक निजी कंपनी को हवाला भुगतान से जुड़ी कथित चैट मिली हैं। इस कंपनी का संचालन पंजाब सरकार के एक कैबिनेट मंत्री के करीबी रिश्तेदार द्वारा किए जाने का दावा किया जा रहा है।
इसी तरह, गमाडा के प्रशासनिक निर्णयों और मास्टर प्लान में बदलावों के संदर्भ में एक अन्य वरिष्ठ अफसर की भूमिका शक के घेरे में है। एक अफसर के गैर-आधिकारिक बैठकों और प्रक्रियाओं से जुड़े वित्तीय फैसलों में शामिल होने की बात सामने आ रही है। इसके अतिरिक्त, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और मुआवजा वितरण में अनियमितताएं बरतने, बिना अनुमति ट्रांसफर डीड निष्पादित करने और चहेतों को अनुचित लाभ पहुंचाने के मामले में एक अन्य अफसर की संलिप्तता बताई जा रही है।
उधर, निजी कंसल्टेंसी कंपनी के माध्यम से सरकारी दफ्तरों से समानांतर संचालन करने और मुआवजा फाइलों व ड्राफ्ट अधिसूचनाओं की निगरानी करने की बात सामने आई है। इसमें भी एक अफसर की भूमिका जांच के दायरे में है।
जांच का एक बड़ी कड़ी गमाडा की बिना बिकी जमीन के रिजर्व प्राइस से जुड़ी है। इस बात की जांच की जा रही है कि नीलामी से पहले कुछ जमीनों के रिजर्व प्राइस को कथित तौर पर कम कर दिया गया। इससे गमाडा और पंजाब सरकार को करीब 10 हजार करोड़ रुपये की चपत लगी।
आप नेता का पूर्व ओएसडी था सक्रिय
ईडी की इस दबिश में राजनीतिक सांठगांठ और अनौपचारिक बैठकों का खुलासा भी किया जा रहा है, मगर अभी इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। ये बैठकें गमाडा अधिकारियों के साथ साइट नीलामी और मास्टर प्लान संशोधन के संदर्भ में हुआ करती थीं। इसी के तहत कई फाइलें पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पूडा) भवन से बाहर भी जाती थीं। दिल्ली के एक वरिष्ठ आप नेता का पूर्व ओएसडी बिना किसी आधिकारिक पद के पूडा भवन में एक कमरे का इस्तेमाल करते थे और अफसरों को निर्देश भी देते थे।