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देश से बढ़कर कुछ नहीं: भारत की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी एलपीयू में भी नहीं मिलेगा तुर्की के छात्रों का दाखिला

Fri, 16 May 2025 04:24 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

देश से बढ़कर कुछ नहीं। यह कर दिखाया है पंजाब के फगवाड़ा स्थित देश की नामी यूनिवर्सिटी एलपीयू ने। क्योंकि एलपीयू ने तुर्की और अजरबैजान के साथ अपने सभी समझौते रद्द कर दिए हैं। 
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी - फोटो : Amar ujala (फाइल)
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारत ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया है। ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत ने पाकिस्तान में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इससे पड़ोसी मुल्क बौखला गया और उसने भारत के साथ युद्ध जैसे हालात पैदा कर ड्रोन हमले किए थे। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान तुर्की और अजरबैजान ने दुश्मन देश का साथ दिया था। तुर्की ने तो पाकिस्तान को ड्रोन बम तक उपलब्ध करवाए थे। पाकिस्तान का साथ देने वाले देश तुर्की और अजरबैजान का भारत में बहिष्कार हो रहा है। यहां तक इन दोनों देशों के साथ भारत व्यापार बंद कर रहा है। 
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इसी सिलसिले में पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) ने भी इन देशों को सबक सिखाने की दिशा में बड़ी पहल की है। एलपीयू ने तुर्की और अजरबैजान के साथ अपने कई समझौतों को रद्द कर दिया है। ऐसा करने वाली एलपीयू देश की पहली यूनिवर्सिटी बन गई है जिसने देश हित में तुर्की और अजरबैजान के साथ अपने सभी समझौतों को रद्द किया है। 

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की तरफ से उक्त दोनों देशों के शिक्षण संस्थानों के साथ छह एकेडमिक पार्टनरशिप को रद्द कर दिया है। यूनिवर्सिटी की तरफ से इन समझौतों के तहत इन देशों के स्टूडेंट्स व फैकल्टी को टर्मिनेट, ज्वाइंट रिसर्च प्रोजेक्ट, ड्यूल डिग्री इंटेंटिव और सभी तरह के एकेडमिक फोर्म को रद्द कर दिया गया है। ऐसे में अब इन देशों के छात्रों को एलपीयू में दाखिला तक नहीं मिलेगा। 
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यूनिवर्सिटी की उठाया गया यह कदम भारतीय शैक्षणिक समुदाय की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं के साथ संरेखण को दर्शाता है, जो बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के जवाब में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग में एक बदलाव का संकेत देता है।

इस संबंध में एलपीयू के फाउंडर चांसलर व राज्यसभा सदस्य डॉ. अशोक कुमार मित्तल का कहना है कि जब हमारी सेनाओं के बहादुर सैनिक अपनी जान पर खेल कर आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन, एयर डिफेंस और सरहद पर सीमा की सुरक्षा करते हैं तो इनता तो हमारा भी फर्ज बनता है कि जो हमारे देश और सेना के खिलाफ होगा उसके साथ हम भी किसी तरह का समझौता नहीं कर सकते।
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