पंजाब में शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी काफी करने की आवश्यकता है, लेकिन स्कूलों में सीखने के परिणाम और गुणवत्ता, शिक्षक उपलब्धता व बुनियादी ढांचे में पहले से सुधार हुआ है।
जालंधर की रैंकिंग पहले के मुकाबले कम हुई है। यह 367 से कम होकर 362 हो गई है, जबकि बाकी सभी जिलों में पिछली रैंकिंग के मुकाबले सुधार हुआ है। यह रिपोर्ट 74 संकेतकों में कुल 600 अंकों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इन्हें 6 श्रेणियों में बांटा गया है, जैसे- परिणाम, प्रभावी कक्षा संचालन, बुनियादी ढांचा सुविधाएं और छात्र अधिकार, स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग और शासन प्रक्रिया शामिल हैं।
इन श्रेणियों को आगे 11 डोमेन में विभाजित किया गया है, जैसे सीखने के परिणाम और गुणवत्ता, पहुंच परिणाम, शिक्षक उपलब्धता, व्यावसायिक विकास परिणाम, सीखने का प्रबंधन, सीखने की समृद्धि गतिविधियां, बुनियादी ढांचा, सुविधाएं, छात्र अधिकार, स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग, फंड उपयोग, उपस्थिति निगरानी प्रणाली और स्कूल नेतृत्व विकास शामिल हैं। इन सभी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए स्कोर दिया गया है, जिसके आधार पर यह रैंकिंग तैयार की गई है।
इस रैंकिंग का मकसद जिलों का ध्यान स्कूली शिक्षा में उन क्षेत्रों की तरफ दिलाना हैं, जहां अधिक काम करने की जरूरत है। इससे जिलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी। जो जिले उच्चतम ग्रेड तक पहुंच जाएंगे, वहां सुविधाएं अधिक होने के साथ समस्याएं कम होंगी।