पंजाब की लैंड पूलिंग नीति के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के नाम पर किसानों का शोषण करने का आरोप लगाया गया है।
डेराबस्सी निवासी नविंदर सिंह ने बताया कि सरकार की 4 जुलाई को लागू की गई यह नीति कई कानूनी प्रावधानों की अवहेलना करती है, जिनमें सामाजिक व पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे अनिवार्य पहलू शामिल हैं। लुधियाना और मोहाली जिलों की उपजाऊ बहुफसली कृषि भूमि को शहरीकरण और विकास के नाम पर अधिग्रहित किया जा रहा है।
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याची ने कहा कि ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी जैसी एजेंसियां भारी विरोध के बावजूद जबरन इस नीति को लागू कर रही हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि हाईकोर्ट न केवल 4 जुलाई की अधिसूचना को रद्द करे, बल्कि 2013 की लैंड पूलिंग नीति को भी असांविधानिक घोषित करे। साथ ही कोर्ट से यह भी अपील की गई है कि राज्य सरकार को किसी भी प्रकार की नई कार्रवाई से रोका जाए। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 19 अगस्त तक स्थगित कर दी।