पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि चालक किसी वाहन को उधार लेकर चला रहा हो और उसकी गलती से हादसा हो जाए तो उसके आश्रित बीमा राशि के लिए दावा नहीं कर सकते। हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल अमृतसर के फैसले पर मुहर लगाते हुए यह आदेश जारी किया है।
27 नवंबर, 2009 को सतनाम सिंह अपने भाई के साथ गोइंदवाल साहिब की तरफ जा रहे थे। इसी बीच उनके निकट से एक वाहन गुजरा जिसकी हेडलाइट के कारण सतनाम सिंह ने वाहन से नियंत्रण खो दिया। उनकी बाइक अनियंत्रित होकर ईंटों से भरी रेहड़ी से टकरा गई और सतनाम सिंह बुरी तरह से घायल हो गया।
सतनाम की मां याचिकाकर्ता जसपाल कौर और अन्य परिजनों ने सात लाख रुपये मुआवजे की मांग को लेकर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में दावा किया था, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी। बीमा कंपनी ने दावे का विरोध करते हुए कहा कि वाहन असल में बलबीर सिंह का था जिसे सतनाम सिंह ने उधार लिया था। ऐसे में वह बीमा कंपनी की शर्त के अनुसार मुआवजे का दावा नहीं कर सकते।