पीठ ने कहा कि मुख्य सचिव को अदालत में बुलाया था ताकि राज्य पहले अपनी अपील की खामियां दूर करवाए और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में उपलब्ध कानूनी उपाय का इस्तेमाल करे। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि फैसला सुनाने के बाद संबंधित खंडपीठ मामले से कार्यमुक्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कथित अवज्ञा का विषय पहले से दायर अवमानना याचिका में ही देखा जाना चाहिए।
डीए विवाद में तीन अगस्त को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के निर्देशों को बरकरार रखा था। इसके बाद राज्य सरकार ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया लेकिन उसकी एसएलपी रजिस्ट्री की खामियों के कारण आगे नहीं बढ़ सकी।
मंगलवार को रजिस्ट्री की रिपोर्ट ने मुख्य सचिव के सोमवार के हलफनामे में किए दावे पर ही सवाल खड़ा कर दिया। अब हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से सीधे जवाब मांगा है कि यदि सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील की वास्तविक स्थिति खामियों से जुड़ी थी तो अदालत के समक्ष उन्हें दूर किए जाने का दावा किस आधार पर किया गया। शुक्रवार की सुनवाई में मुख्य सचिव की व्यक्तिगत मौजूदगी और उनके जवाब पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।