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Highcourt: पिता ने पाकिस्तान में जासूसी कर 10 साल सजा काटी, बेटे की एसआई बनाने की गुहार हाईकोर्ट ने ठुकराई

Wed, 04 Jun 2025 05:06 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

याचिकाकर्ता नीरज शर्मा ने अदालत को बताया कि उनके पिता खुफिया एजेंट थे जिन्हें दिसंबर 1968 में पाकिस्तान की सेना ने जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था। वहां उन्हें सैन्य अदालत ने दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई और वे दिसंबर 1974 में रिहा होकर वाघा-अटारी बार्डर के रास्ते भारत लौटे थे।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए याची को पंजाब पुलिस में सब इंस्पेक्टर बनाने की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि भले ही उसके पिता ने देश के लिए खुफिया एजेंट के रूप में काम किया हो और पाकिस्तान की जेल में दस साल की लंबी सजा भुगती हो, लेकिन बिना किसी स्पष्ट नीति के उसे सब-इंस्पेक्टर नियुक्त करने का आदेश नहीं जारी किया जा सकता।

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नीरज शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए पंजाब सरकार के 7 फरवरी, 2024 को जारी आदेश और उससे पूर्व व बाद में विभिन्न तिथियों पर उनकी नियुक्ति संबंधी मांगों को ठुकराने वाले आदेशों को रद्द करने की अपील की थी। याचिकाकर्ता नीरज शर्मा ने अदालत को बताया कि उनके पिता खुफिया एजेंट थे जिन्हें दिसंबर 1968 में पाकिस्तान की सेना ने जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था। वहां उन्हें सैन्य अदालत ने दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई और वे दिसंबर 1974 में रिहा होकर वाघा-अटारी बार्डर के रास्ते भारत लौटे थे।

याची ने बताया कि उसने 6 अगस्त, 2008 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री को एक प्रार्थना पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने अपने पिता की देशसेवा का हवाला देते हुए सरकारी नौकरी देने की अपील की थी। उन्होंने उदाहरण दिया कि होशियारपुर निवासी कश्मीर सिंह जो पाकिस्तान में 35 साल कैद रहने के बाद रिहा हुए थे, सरकार ने उन्हें राहत दी थी। 
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फाजिल्का (तत्कालीन फिरोजपुर) के उपायुक्त ने 27 नवंबर, 2013 को एक रिपोर्ट में बताया कि याचिकाकर्ता की पारिवारिक मासिक आय मात्र 6,000 रुपये थी और उनके पास केवल तीन मरले का एक मकान था। इसके आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने 24 दिसंबर, 2014 को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की थी।

दुर्भाग्यवश, उनके पिता का निधन 22 अक्टूबर, 2018 को हो गया। याचिकाकर्ता ने अपनी शैक्षणिक योग्यता डिप्लोमा इन फार्मेसी और बीएससी (मेडिकल) का हवाला देते हुए कहा कि वे योग्य हैं और उन्हें सब-इंस्पेक्टर या कम से कम असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर की नियुक्ति मिलनी चाहिए। सरकार ने उन्हें कांस्टेबल पद की पेशकश की, जिसे उन्होंने स्वीकार भी कर लिया, लेकिन वह लगातार उच्च पद की मांग करते रहे। उनके वकील ने अदालत में यह दलील दी कि ऐसे ही मामलों में अन्य लोगों को ग्रेड-बी पद प्रदान किए गए हैं, तो समानता के आधार पर नीरज शर्मा को भी कम से कम एएसआई का पद दिया जाना चाहिए।

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