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हाईराइज नहीं, हेरिटेज ही चाहिए: चंडीगढ़ मास्टर प्लान पर 200 से ज्यादा आपत्तियां, वर्टिकल ग्रोथ का विरोध

Fri, 26 Jun 2026 10:45 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कर्नल गुरसेवक सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि मौजूदा सीवरेज, ड्रेनेज और जलापूर्ति नेटवर्क इतनी बड़ी आबादी का दबाव झेलने में सक्षम नहीं है। यदि वर्टिकल ग्रोथ को बिना बुनियादी ढांचे को मजबूत किए लागू किया गया तो शहर की मूलभूत सुविधाओं के चरमराने का खतरा बढ़ जाएगा।
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चंडीगढ़ में हाईराइज बिल्डिंग का विरोध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मास्टर प्लान-2031 के मसौदे पर गठित स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष अब तक 200 से अधिक आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा विरोध हाईराइज इमारतों और वर्टिकल ग्रोथ के प्रस्तावों को लेकर है। 
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आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि चंडीगढ़ के हेरिटेज स्वरूप से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे शहर की मूल पहचान प्रभावित होगी और ट्रैफिक का दबाव भी कई गुना बढ़ जाएगा। अधिकतर आपत्तिकर्ताओं ने कहा कि शहर का सीवरेज, पेयजल और बिजली आपूर्ति तंत्र पहले से ही दबाव में है। ऐसे में हाईराइज इमारतों और बढ़ती आबादी का बोझ इन बुनियादी सुविधाओं पर और भारी पड़ेगा। आपत्तियों की सुनवाई के लिए गठित स्क्रीनिंग कमेटी की प्रमुख प्रेरणा पुरी और उनकी टीम ने दो सत्रों में लोगों की दलीलें सुनीं।

कर्नल गुरसेवक सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि मौजूदा सीवरेज, ड्रेनेज और जलापूर्ति नेटवर्क इतनी बड़ी आबादी का दबाव झेलने में सक्षम नहीं है। यदि वर्टिकल ग्रोथ को बिना बुनियादी ढांचे को मजबूत किए लागू किया गया तो शहर की मूलभूत सुविधाओं के चरमराने का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने बताया कि आबादी के इस अत्यधिक दबाव को झेलने के लिए शहर का मौजूदा सीवरेज सिस्टम, ड्रेनेज और पानी की लाइनें सक्षम नहीं हैं जिससे सुविधाएं पूरी तरह ठप होने का डर है।
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ऊंची इमारतों के प्रस्ताव पर सबसे ज्यादा आपत्तियां

सबसे ज्यादा विरोध चंडीगढ़ के हेरिटेज स्वरूप से छेड़छाड़ को लेकर दर्ज किया गया है। रेजीडेंट्स का कहना है कि चंडीगढ़ की पहचान उसकी खुली, सुनियोजित और कम घनत्व वाली बसावट है। आपत्तियों में स्पष्ट किया गया है कि यदि ऊंची इमारतों और वर्टिकल ग्रोथ को मंजूरी दी गई तो शहर का मूल स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। इसके साथ ही एक ही क्षेत्र में आबादी का घनत्व तेजी से बढ़ेगा, जिससे ट्रैफिक, सीवरेज, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। उनका तर्क है कि मास्टर प्लान में शहर के हेरिटेज चरित्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

मास्टर प्लान में दोहरे मानदंड मंजूर नहीं

मास्टर प्लान में दोहरे मानदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। शहर की मूल पहचान और नियोजित स्वरूप को बरकरार रखते हुए ही भविष्य की योजना तैयार की जानी चाहिए। - बलजिंदर सिंह बिट्टू, फॉसवेक के चेयरमैन

मूलरूप से छेड़छाड़ न हो, समस्याओं का समाधान करें

चंडीगढ़ के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। यदि शहर में पार्किंग जैसी समस्याएं हैं तो उनका समाधान किया जाए, न कि हेरिटेज चरित्र को प्रभावित करने वाले बदलाव किए जाएं। -जेएस गोगिया, फॉसवेक के महासचिव

दर्ज करवानी थीं आपत्तियां, अपनी शिकायत लेकर आए लोग

मास्टर प्लान-2031 को लेकर प्रशासन द्वारा गठित स्क्रीनिंग कमेटी के पास वीरवार को काफी लोग ऐसे आए जिनकी अपने इलाके की समस्याएं थीं। मसलन, किसी के डिपो को क्लीयरेंस नहीं मिल रहा था तो किसी को इलाके की पार्किंग की समस्या थी। ऐसे मामलों को भी स्क्रीनिंग कमेटी ने समझा और उनको आश्वस्त किया कि इसके लिए भी व्यवस्था की जाएगी।

स्क्रीनिंग कमेटी से आज मिलेंगे उद्यमी
चंडीगढ़ के उद्यमी और चंडीगढ़ व्यापार मंडल के सदस्य स्क्रीनिंग कमेटी को अपने सुझाव और आपत्तियां देने के लिए शुक्रवार को पहुंचेंगे। उद्यमियों को प्रमुख मुद्दों में एमएसएमई एक्ट को पूरी तरह से लागू करने के साथ ही उद्योग में सरलीकरण करने को लेकर हैं। इसके साथ ही एफएआर को बढ़ाने के साथ ही इंडस्ट्री को बिना तोड़े उसके लिए नए प्रावधान करवाने की मांग है। वहीं, व्यापार मंडल बूथों पर एक दूसरे फ्लोर की मांग और एफएआर के साथ अन्य मुद्दों को लेकर जाएगा।

हमारे पास अभी लोग अपनी आपत्तियां दर्ज करवा रहे हैं। जो प्रारूप बनेगा आपत्तियां भेजी जाएगी। - प्रेरणा पुरी, स्क्रीनिंग कमेटी की प्रमुख
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