पंजाब के गांवों में पुश्तों से चले आ रहे संपत्ति विवादों का समाधान होने वाला है। केंद्र सरकार ने डिजिटल स्वामित्व मानचित्रण सर्वेक्षण का काम लगभग पूरा कर लिया है। अंतिम चरण में 319 गांवों का ड्रोन से सर्वेक्षण किया गया है। अब घर-घर जाकर सर्वेक्षण काम काम चल रहा है और संपत्ति का रिकॉर्ड एकत्र किया जा रहा है।
स्वामित्व योजना से गांवों में लोगों को संपत्ति का स्वामित्व तो मिल ही रहा है साथ ही यह कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त संपत्ति कार्ड भी प्रदान करता है। लोग संपत्ति पर ऋण ले सकते हैं। भूमि के डिजिटल व सटीक रिकॉर्ड बनते हैं। ग्राम पंचायतों को संपत्ति कर निर्धारण में मदद मिलती है जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
योजना के तहत भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) सर्वेक्षण के बाद ये कार्ड जारी किए जा रहे हैं। सभी रिकॉर्ड अपडेट किए जा रहे हैं। जिन संपत्तियों के रिकॉर्ड अपडेट किए जा रहे हैं उनमें दोबारा विवाद नहीं होंगे। जीआईएस एक भू-विज्ञान सूचना प्रणाली है। यह संरचनात्मक डाटा बेस पर आधारित है। यह भौगोलिक सूचनाओं के आधार पर जानकारी प्रदान करती है। संरचनात्मक डाटाबेस तैयार करने के लिए वीडियो, भौगोलिक फोटोग्राफ और जानकारियों के आधार का कार्य किया जाता है। ड्रोन के जरिये नगर निगम क्षेत्र का सर्वे किया जाता है।
अब तक पूरे देश में 1.82 लाख गांवों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है जिसके तहत 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड भी तैयार किए जा चुके हैं।