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नया संकट: कनाडा में 10 लाख भारतीयों के अवैध घोषित होने का खतरा, वर्क परमिट खत्म होने के बाद पीआर के रास्ते बंद

Tue, 06 Jan 2026 08:08 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

कनाडा सरकार और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार 2025 के अंत तक करीब 10.53 लाख वर्क परमिट एक्सपायर हो चुके हैं। 2026 में लगभग 9.27 लाख और परमिट खत्म होने वाले हैं। कुल मिलाकर लगभग 19-20 लाख लोग अपने लीगल स्टेटस के जोखिम में हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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कनाडा में रहने वाले लाखों भारतीयों के लिए यह साल गंभीर संकट लेकर आया है। वर्क और स्टडी परमिट की समाप्ति के कारण लगभग 10 लाख भारतीय अवैध होने के जोखिम में हैं। साथ ही स्थायी निवास (पीआर) के सीमित विकल्प और बढ़ती बेरोजगारी ने स्थिति और जटिल बना दी है।

वर्क परमिट का संकट 

कनाडा सरकार और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार 2025 के अंत तक करीब 10.53 लाख वर्क परमिट एक्सपायर हो चुके हैं। 2026 में लगभग 9.27 लाख और परमिट खत्म होने वाले हैं। कुल मिलाकर लगभग 19–20 लाख लोग अपने लीगल स्टेटस के जोखिम में हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है, विशेषकर पंजाबियों की। एडमिंटन स्थित इमिग्रेशन एक्सपर्ट परविंदर मोंटू का कहना है कि यदि पीआर या नया वीजा नहीं मिला, तो करीब 10 लाख भारतीय तकनीकी रूप से अवैध प्रवासी बन सकते हैं।

नीतियों में बदलाव

न्यू इमेज की पूजा सिंह के अनुसार, कनाडा सरकार ने बीते दो वर्षों में अस्थायी निवासियों की संख्या को जनसंख्या के 5% तक सीमित करने का लक्ष्य रखा है। पीआर के लिए कट-ऑफ स्कोर बढ़ा दिए गए हैं। स्टूडेंट-वर्क ट्रांजिशन के रास्ते लगभग बंद हो गए हैं। फर्जी कॉलेजों और एजेंटों पर कार्रवाई के चलते हजारों आवेदन रद्द कर दिए गए हैं। इसका सबसे अधिक असर भारतीय छात्रों, ट्रक ड्राइवरों, फैक्ट्री वर्कर्स और डिलीवरी सेक्टर में काम करने वालों पर पड़ा है।

टेंट सिटी बनती कनाडा

ग्रेटर टोरंटो एरिया, ब्रैम्पटन, मिसिसॉगा और वैंकूवर के बाहरी इलाकों में महंगे किराए और वर्क परमिट खत्म होने के कारण लोग कैश जॉब्स पर निर्भर हैं। जंगलों और खाली जमीनों पर टेंट लगने लगे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं, बीमा और कानूनी सुरक्षा से बाहर रहने की वजह से स्थिति मानवीय संकट का रूप ले रही है।

कनाडा में स्टेटस रिस्टोर करने का नियम

वीजा या वर्क परमिट खत्म होने के 90 दिनों के भीतर स्टेटस रिस्टोर करना जरूरी है। पीआर कोटा सीमित है। नई नौकरी पर वर्क परमिट मुश्किल है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि मानवीय संकट बढ़ रहा है, सरकार नीतियों में बदलाव के लिए तैयार नहीं हैं। लाखों भारतीय कनाडा में कानून और मजबूरी के बीच फंसे हुए हैं। सरकार की सख्त नीतियों और लंबी प्रोसेसिंग के कारण उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।

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