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चन्नी ने आप पर बोला हमला: कहा- शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल के दावे खोखले, केंद्रीय फंड का किया गया दुरुपयोग

Mon, 31 Aug 2026 05:14 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर

सार

चन्नी ने दावा किया कि आयुष्मान योजना के भुगतान में असमानता के कारण निजी अस्पतालों का बकाया बढ़ा और कई अस्पतालों ने योजना के तहत इलाज बंद कर दिया।
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चरणजीत चन्नी, पूर्व सीएम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने आम आदमी पार्टी सरकार के स्वास्थ्य और शिक्षा मॉडल पर तीखा हमला बोला। चन्नी ने प्रशासनिक बैठकों और कथित जमीनी आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही, केंद्रीय फंड के कथित दुरुपयोग और सरकारी स्कूलों की बदहाली के गंभीर आरोप लगाए।

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चन्नी ने आरोप लगाया कि जालंधर के एक सरकारी अस्पताल में कथित तौर पर ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से तीन मरीजों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच और पोस्टमार्टम के बजाय मौत की वजह हार्ट अटैक बताकर मामले को दबाने की कोशिश की गई। चन्नी ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

542 करोड़ के केंद्रीय फंड पर सवाल
पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि 15वें वित्त आयोग से गांवों के जल निकासी और विकास कार्यों के लिए मिले 542 करोड़ को बिजली बोर्ड को ट्रांसफर किया गया। चन्नी ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए सरकार से फंड के इस्तेमाल पर जवाब मांगा।

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आयुष्मान योजना को लेकर भी घेरा
चन्नी ने दावा किया कि आयुष्मान योजना के भुगतान में असमानता के कारण निजी अस्पतालों का बकाया बढ़ा और कई अस्पतालों ने योजना के तहत इलाज बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है। केजरीवाल के गुजरात दौरे और पंजाब मॉडल पर निशाना साधते हुए चन्नी ने कहा कि गुजरात के लोगों को केवल विज्ञापनों के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के कई सरकारी स्कूलों में बेंच, पीने का पानी, शौचालय, यूनिफॉर्म और पर्याप्त शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं। 

कई स्कूल सिंगल टीचर के भरोसे चल रहे हैं। चन्नी ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान खरड़ में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार मॉडल स्कूल और दो एसी स्कूल लंबे समय से उपयोग में नहीं लाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पुराने प्रोजेक्ट्स पर केवल नया बोर्ड लगाकर उन्हें ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ के नाम से पेश किया जा रहा है। चन्नी ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावों के बजाय सरकार को जमीनी समस्याओं और फंड के इस्तेमाल पर जवाब देना चाहिए।
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