चूल्हा जलाने के लिए ईंधन तक नहीं
खेती के लिए जमीन नहीं बची है। जहां तक नजर जाती है रेत ही रेत के टीले दिखते हैं। कुछ मकान टूट गए और कुछ दरिया में गिर गए हैं। गांव में जो लोग रह रहे हैं उन्हें रोटी बनाने के लिए चूल्हा जलाने के लिए ईंधन तक नहीं है। ग्रामीणों के लिए अब दरिया में नाव चलाना भी मुश्किल है। बीएसएफ की नाव में ग्रामीण आते और जाते हैं।
सुरक्षित जगह पर प्लॉट मिले
ग्रामीण लखविंदर सिंह ने मांग की कि सरकार टापू कालू वाला के परिवारों को कहीं सुरक्षित जगह पर प्लॉट दे ताकि वे मकान बना कर रह सकें। वहीं, लोगों की मांग है कि उनके गांव को कोई गोद ले, तभी ये गांव बच सकता है नहीं तो दरिया में समा जाएगा।