पिछले चुनाव के मुकाबले गिरे मतदान प्रतिशत ने नेताओं की भी चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते वह गुणा-भाग में जुट गए हैं। राजनीतिक पंड़ितों के अनुसार आम तौर पर मतदान प्रतिशत के बढ़ने से सत्तापक्ष व गिरने से विपक्ष को फायदा मिलता है। हालांकि विपक्षी व सत्तापक्ष के गढ़ में मतदान प्रतिशत के इस बड़े उलटफेर ने सभी को चौंका दिया है, जिससे साफ है कि इस बार चुनावी नतीजे चौंकाने वाले रहेंगे।
पंजाब की चार विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में वर्ष 2022 के मुकाबले इस बार मतदान प्रतिशत में गिरावट देखने को मिली है। विपक्षी गढ़ में सबसे अधिक व सत्तापक्ष के गढ़ में कम मतदान हुआ है और इसने राजनीतिक दलों का समीकरण भी बिगाड़ दिया है।
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गिद्दड़बाहा में 81.90 फीसदी मतदान... लेकिन पिछली बार से कम
गिद्दड़बाहा में सबसे अधिक 81.90 फीसदी मतदान हुआ है, जो पिछली बार से कम है। वर्ष 2022 चुनाव में इस सीट पर 84.93 फीसदी मतदान हुआ था। इसी तरह डेरा बाबा नानक में 64.01 फीसदी मतदान हुआ है, जबकि पिछली बार यहां 73.70 फीसदी मतदान हुआ था। दोनों सीट पर पिछले तीन चुनावों से कांग्रेस का कब्जा रहा है, इसलिए इन सीटों को कांग्रेस का गढ़ भी कहा जाता है। शिरोमणि अकाली दल ने यह उपचुनाव नहीं लड़ा है, लेकिन पार्टी के कुछ स्थानीय नेता आप को समर्थन करते जरूर नजर आए। यही कारण है कि इससे कांग्रेस की चिंता भी बढ़ गई है। यह दोनों सीटें कांग्रेस की साख का सवाल बनी हुई हैं।
दो सांसदों की पत्नियां मैदान में
गिद्दड़बाहा में पंजाब कांग्रेस प्रधान की पत्नी अमृता वड़िंग व डेरा बाबा नानक में पूर्व डिप्टी सीएम व मौजूदा सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की पत्नी जतिंदर कौर चुनाव मैदान में थीं। हालांकि राजनीतिक गलियारों में पहले यह चर्चा चल रही थी कि अकाली नेता भाजपा उम्मीदवारों को अपना समर्थन दे सकते हैं। खासकर गिद्दड़बाहा में भाजपा से मनप्रीत बादल चुनाव मैदान में उतरे थे और उन्होंने शिअद से ही अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी और जनवरी 2023 में वह भाजपा में शामिल हो गए थे।
बरनाला-चब्बेवाल में गिरा मतदान प्रतिशत
बरनाला सीट पर मतदान प्रतिशत में काफी ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। यहां 56.34 फीसदी वोटिंग हुई है, जबकि वर्ष 2022 में 71.45 फीसदी वोटिंग हुई थी। वर्ष 2017 से ही यहां पर आप के गुरमीत सिंह मीत हेयर लगातार दो बार विधायक चुने गए थे। अब इस सीट से उनके खास हरिंदर सिंह ने चुनाव लड़ा है। यही कारण है कि मीत हेयर के लिए भी यह सीट साख का सवाल बनी हुई है, लेकिन वोट प्रतिशत गिरने से आप को झटका जरूर लगा है। इसके अलावा चब्बेवाल में भी पिछले चुनाव के मुकाबले वोट प्रतिशत कम हुआ है।