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शिअद में संगठन का एलान जल्द: संकट में जिन्होंने दिया था सुखबीर का साथ, उनका बढ़ेगा कद; विरोधी होंगे बाहर

Mon, 14 Apr 2025 09:49 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सुखबीर बादल के सामने फिलहाल प्रमुख चुनौती पार्टी को दोबारा खड़े करने की है। शिअद का 2017 के बाद हुए सभी चुनाव में ग्राफ गिरता जा रहा है। पिछले कुछ चुनाव में पार्टी को सिर्फ हार का सामना ही नहीं करना पड़ा है, बल्कि वोट बैंक को भी काफी नुकसान हुआ है।
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सुखबीर बादल - फोटो : X @officeofssbadal
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विस्तार
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सुखबीर बादल के शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रधान बनने के बाद अब पार्टी में आगे राज्य स्तर के पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसकी प्रक्रिया अगले हफ्ते से शुरू हो जाएगी।
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संकट में सुखबीर का साथ देने वाले नेताओं का पार्टी में कद बढ़ेगा, जबकि विरोधियों को बाहर करने की तैयारी की जा रही है। सबसे पहले वर्किंग व कोर कमेटी गठित की जाएगी, जिसके बाद ही सभी जिलों में प्रधानों की नियुक्ति होगी। जिला स्तर के पदाधिकारियों का पहले ही एलान किया जा चुका है।
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सभी तरह के अधिकार सुखबीर को साैंपे

संगठन के विस्तार को लेकर पहले ही सभी तरह के अधिकार सुखबीर को सौंप दिए गए हैं। इसमें वर्किंग, कोर कमेटी और अनुशासनात्मक कमेटी समेत अन्य कमेटियां शामिल हैं। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि अगले सप्ताह से पार्टी के संगठन विस्तार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। राज्य स्तर पर सभी पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, जिसके लिए पहले वर्किंग व कोर कमेटी गठित की जाएगी।

वर्किंग कमेटी की बैठक करके पदाधिकारियों का एलान किया जाएगा। शिअद में बलविंदर सिंह भूंदड़, डॉ. दलजीत सिंह चीमा और मुख्य प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसी तरह लंबे समय से पार्टी नेतृत्व का विरोध करते रहे कुछ नेताओं की शिअद छुट्टी भी कर सकता है।
 

पार्टी के वरिष्ठ नेता हो रहे दूर 

पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शिअद से दूर होते जा रहे हैं। पार्टी में खुद को सरपरस्त बताने वाले सुखदेव सिंह ढींडसा भी बागी गुट के समर्थन में खुलकर उतर आए, जिस कारण शिअद को उनकी बर्खास्तगी के आदेश जारी करने पड़े थे। पार्टी नेतृत्व में बदलाव को लेकर गुरप्रताप सिंह वडाला, बीबी जगीर कौर, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, परमिंदर सिंह ढींडसा, सिकंदर सिंह मलूका, सुरजीत सिंह रखड़ा, सुरिंदर सिंह ठेकेदार और चरणजीत सिंह बराड़ का भी एक अलग धड़ा बन गया। विरोध बढ़ता देख शिअद को इन्हें भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा।

इससे पहले सीनियर नेता विरसा विरसा सिंह वल्टोहा भी पार्टी छोड़ चुके हैं। पूर्व मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों को खुद ही शिअद ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते निष्कासित कर दिया था।
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