खन्ना साइबर क्राइम थाना पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने ठगी की गई पूरी रकम 21 लाख 41 हजार रुपये पीड़ित डॉक्टर को वापस दिलवाकर बड़ी राहत दी है। यह मामला 13 जनवरी को थाना साइबर क्राइम, खन्ना में दर्ज किया गया था।
यह कार्रवाई पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव (आईपीएस) और लुधियाना रेंज के डीआईजी सतिंदर सिंह के दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई। वरिष्ठ कप्तान पुलिस खन्ना डॉ. दर्पण आहलूवालिया (आईपीएस) के नेतृत्व में साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत यह सफलता मिली।
मामले में शिकायतकर्ता डॉ. गुरजीत सिंह निवासी कर्मसर, राड़ा साहिब ने पुलिस को बताया कि अज्ञात लोगों ने उन्हें एमएसएमई ग्रांट और इनोवेट महाटेक स्कीम के तहत 5.5 करोड़ रुपये की ग्रांट दिलाने का झांसा दिया। आरोपियों ने लोन और ग्रांट दिलाने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में 21 लाख 41 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए और बाद में संपर्क पूरी तरह तोड़ लिया।
शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की। जांच के दौरान 1930 साइबर पोर्टल की मदद से 20 लाख 82 हजार 700 रुपये की राशि को समय रहते होल्ड कर लिया गया। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने राजस्थान, मुंबई और जयपुर से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेघना निवासी मुंबई/जयपुर, पुष्कर निवासी बाड़ी जिला धौलपुर (राजस्थान) और भूपेंद्र शर्मा निवासी झालावाड़ (राजस्थान) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों से कुल 21 लाख 41 हजार रुपये की पूरी ठगी की रकम बरामद की।
पुलिस के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पूरी राशि शिकायतकर्ता को वापस कर दी गई है। खन्ना साइबर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, ओटीपी या बैंक डिटेल्स साझा न करें। यदि साइबर धोखा धड़ी होती है तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाएं, ताकि ठगी की रकम समय रहते रोकी जा सके।